आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की ऐसी टिपण्णी, जो इसका लाभ उठाने वालो को चिंता में डाल देगा

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वैसे तो आरक्षण का कई लोग विरोध करते है चाहे किसी भी वर्ग से हो लेकिन जब इसका फायदा उठाने की बात आती है तो हर कोई जो भी लाभार्थी है वो उठाता है और अगर किसी वंचित को ये कहा जाए कि उसे आरक्षण मिलेगा तो वो भी इसके लिए तैयार हो जाएगा. मगर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस मामले पर जो कहा है वो अपने आप में काफी ज्यादा बड़ी बात है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु के राजनीतिक संगठनों के द्वारा एक अर्जी डाली गयी थी जिसमे ओबीसी के लिए 50 फीसदी आरक्षण सम्बन्ध में मांग थी.

इस मांग को न सिर्फ कोर्ट में न सिर्फ सुनने से मना किया गया बल्कि साथ ही साथ में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ी ही तल्ख़ टिप्पणी की जिसमे कहा कि आरक्षण कोई बुनियादी या फिर मौलिक अधिकार नही है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पूछा कि जब आप आरक्षण को मौलिक अधिकारों से जोडकर के लाये है

तो पहले ये बताइए कि यहाँ पर किसका मौलिक अधिकार छीना गया है? आपकी दलीलों को देखकर के ऐसा लगता है कि आप सिर्फ कुछ लोगो की भलाई की बात ही कर रहे है. आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नही है. हालांकि कोर्ट ने उनके मसले को पूरी तरह से खारिच नही किया और कहा कि आप लोग हाई कोर्ट में चले जाइए और वहाँ पर इस मसले को देखिये लेकिन ये मामला सुप्रीम कोर्ट में नही सुना जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट का ये कहना कि ये आरक्षण कोई मौलिक मूलभूत या फिर बुनियादी अधिकार नही है संविधान की एक बहुत ही गहरी विवेचना करता है जिससे पता चलता है कि अगर भविष्य में किसी वर्ग को आरक्षण से वंचित किया जाता है तो वो ये नही कह सकता है कि उसे उसके मूलभूत अधिकार से वंचित कर दिया गया है और उसका हनन हो रहा है.