अब कश्मीर को लकर पास हुआ नया क़ानून, खुश हो गये अमित शाह

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कश्मीर में जब से धारा 370 हट गयी है उसके बाद से ही केंद्र की ताकत काफी ज्यादा बढ़ गयी है और इस हद तक बढ़ चुकी है कि वो नए क़ानून भी बहुत सारे अपने अपने स्तर पर ला रहे है जो कश्मीर में बड़े स्तर पर बदलाव लाने की तरफ अग्रसर होते हुए नजर आते है. अगर हम अभी की बात करे तो कश्मीर में हाल ही में एक और नया क़ानून है जो कि लोकसभा से पास हो गया है और राज्यसभा से भी निकल जाएगा क्योंकि बीजेपी अब पूरी तरह से बहुमत में है.

अब सवाल ये है कि हुआ क्या है? तो दरअसल अब कश्मीर में सिर्फ वहाँ की लोकल भाषा ही आधिकारिक भाषा नही रहेगी. अब कश्मीर की आधिकारिक भाषा में हिंदी, इंग्लिश, उर्दू, डोगरा और अंत में कश्मीरी भी होगी. इन्हें कश्मीर की आधिकारिक भाषा का दर्जा संसोधन के माध्यम से दे दिया गया है.

बहुत लम्बे वक्त से वहाँ की कश्मीर की लोकल पार्टियाँ कोशिश में थी कि ऐसा कुछ भी न होने पाए और ऐसा करने के पीछे कारण भी था कि अगर ऐसा होता तो फिर कही न कही एक ग्लोबल कश्मीर खड़ा हो जाता जहाँ पर भाषा समता आती और इससे वहाँ के लोगो के लिए बाहर वालो से कम्यूनिकेशन बेहतर होता अगर वहाँ ज्यादा भाषाओं का चलन होता. मगर ऐसा हुआ नही और देखते ही देखते काफी बड़े स्तर पर अब बदलाव हो रहा है.

अमित शाह ने इस मौके पर ख़ुशी जताते हुए इसे एक तरह से ऐतिहासिक पल बताया है क्योंकि कभी किसी ने ये करने की सोची तक नही थी क्योंकि बहुत ही बड़ी संख्या में लोग है जो यहाँ पर इस कोशिश में रहते है कि बड़े स्तर पर चीजो में बदलाव किये जाए और अब नेशनल नीतियों के आधार पर देखे तो ऐसा हुआ भी है.