इस दिन भूलकर भी मत खाना चावल वरना माँ हो जायेगी नाराज, चली जायेगी धन सम्पति

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कभी कभी आपने अपने बड़े बुजुर्गो से सुना होगा कि इस वार को ये नही करना चाहिए और तमाम तरह की बाते आपको सुनने को मिल ही जाती होगी क्योंकि कही न कही ये होता ही है और इसके पीछे हमारी पुरानी धार्मिक मान्यताएं और कई चीजे है जो इसमें लगी होती है और इस कारण से ही इनको माना भी जाता है ये आप भी नोट कर चुके होंगे. अगर हम लोग अभी की बात करते है तो फिर आपको एक बार और पता होनी चाहिए कि जब भी एकादशी की तिथि आती है तो इस दिन कभी भी चावल नही खाने चाहिए.

अक्सर आपने बड़े बुजुर्गो से भी ये बात सुनी ही होगी कि जब भी एकादशी तिथि आती है तो फिर उस दिन हमें चावल का या फिर चावल से बनी हुई चीजो का सेवन नही करना चाहिए और इसके पीछे एक पूरी पौराणिक कथा बनी हुई है.

इसके अनुसार एक मेधा नाम का ऋषि हुआ करता था जिसने माँ के क्रोध से बचने के लिये अपना शरीर छोड़ दिया था और उसने जब शरीर छोड़ा तो उसका एक अंश आकर के धरती भी गिरा और जहाँ पर ये गिरा वहाँ पर चावल उग आये. उस दिन यही तिथि थी और यही कारण है कि इस दिन कभी भी चावल का सेवन नही करना चाहिए और जो करता है वो रेंगने वाले जीवो की श्रेणी में अगला जन्म लेता है इसलिए ऐसा कभी नही करना चाहिए.

इसके अलावा माँ का प्रकोप भी पड़ता है जिससे उसके घर से सम्पति कम हो जाती है जो कही न कही उनकी कृपा के कारण आयी होती है तो इन बातो का ध्यान रखना होता है. हाँ ये कलियुग है तो इन बातो पर लोग उतना भरोसा रखते नही है लेकिन वो कहते है मानो तो गंगा माँ है और न मानो तो फिर बहता पानी है.