नसबंदी करवाने के बाद भी प्रेगनेंट हो गयी महिला, अब नाराज होकर उठाया ऐसा कदम

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विश्व-भर में बढ़ती जनसंख्या को देख मेडिकल साइंस ने इस पर रोक लगाने के लिए एक स्थाई तरीका खोज निकाला है. जिससे ऐसी महिलाओं की नसबंदी करवा दी जाती है, जो अब अपने परिवार को नहीं बढ़ाना चाहती है. यह जनसंख्या नियंत्रण का महत्वपूर्ण उपाय है. सरकार द्वारा हर साल जनसंख्या नियंत्रण से जुडी योजनायें लाई जाती है, जिसमे महिलाओं की निशुल्क नसंबदी की जाती है. इसमे कई लोग मिल कर सरकार के ऐसे कार्यक्रमों को सफल बनाते है और देश के विकास में सहायता प्रदान करते है.
आज हम आपको ऐसे एक मामले के बारे में बताने जा रहे है, जिसमे एक महिला की नसबंदी करने के बाद भी वह महिला गर्भवती हो जाती है और फिर मुआवजे के रूप में सरकार से 11 लाख रुपये की मांग करती है. तो आइये है क्या है पूरा मामला?

नसबंदी के बाद भी गर्भवती हो गई महिला, उपभोक्ता मंच में की शिकायत

दरअसल यह पूरा मामला बिहार के मुजफ्फरपुर शहर का है, जहा पर एक महिला अपने चार बच्चों के हो जाने के बाद नसबंदी करवाना चाहती थी. रिपोर्ट्स के अनुसार जब उस महिला को अपने शहर के एक सरकारी अस्पताल में चल रहे परिवार नियोजन कार्यक्रम के बारे में पता चला तो वह 27 जुलाई 2019 को वहा पर अपने पति के साथ चली गई. फुलवंती नाम की इस महिला ने डॉक्टर के बताये निर्देशों का पालन किया और सरकार की इस योजना के तहत नसबंदी करवा ली. अपनी नसबंदी के करीब 2 साल बाद यह महिला गर्भवती हो गई.

इस बारे में महिला ने बताया की नसबंदी के 2 साल बाद एक दिन उसे दिन के 3 बजे उल्टी होने लगी और तबियत खराब सी लगने लगी, जिसके बाद उसके पति उसे नजदीकी अस्पताल ले गए. वहा पर डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में फुलवंती को गर्भवती बताया. यह सुनकर फुलवंती चौक गई कि नसबंदी करवाने के बाद वह गर्भवती कैसे हो सकती थी. गरीब होने के कारण अब वह एक और बच्चे की जिम्मेदारी लेने में असमर्थ थी. इसके बाद वह गर्भवती होने की रिपोर्ट्स और अपनी नसबंदी की रिपोर्ट्स लेकर उपभोक्ता मंच में शिकायत करने गई. वहा पर उसने अपनी रिपोर्ट्स पेश कर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवा दी और अपने गर्भवती होने के लिए ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर को दोषी ठहराया.

मुआवजे के रूप में मांगी सरकार से 11 लाख रूपये की धनराशि

फुलवंती नाम इस महिला के इस मामले की पुष्टि तब हुई जब डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा. इसके बाद रिपोर्ट्स आ गई और गर्भवती होने की पुष्टि हो गई. वह इस बच्चे को लेकर बहुत गहरे तनाव में आ गई थी. गरीब परिवार होने की वजह से वह अब एक और बच्चे को नहीं पाल सकती थी. ऐसे में उसने डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लगाकर उपभोक्ता मंच में शिकायत दर्ज करवा ली थी. उन्होंने सरकार को अपनी सारी रिपोर्ट्स दे दी है और सरकार से करीब 11 लाख रूपये मुआवजे की राशि की मांग की है. पीड़ित महिला के इस मामले को दर्ज कर लिया गया है और 15 मार्च को इस मामले की सुनवाई की जाएगी.