Polygon: ये तीन युवा क्रिप्टोकरेंसी की मदद से बने अरबपति, पहले करते थे साधारण नौकरी

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आजकल सारी दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) बहुत सुर्खियों में है। हमारे देश में भी क्रिप्टोकरेंसी का चलन बढ़ता जा रहा है। चाहे एलन मस्क के कारण इसका क्रेज़ बढ़ा हो या फिर चीन से, कारण जो भी हो, पर वर्तमान समय में विश्व में क्रिप्टोकरेंसी एक ख़ास चर्चा का मुद्दा बन गया है।

भारत का ही एक उदाहरण लें तो ऐसे 3 भारतीय भी हैं, जिन्होंने क्रिप्टोकरेंसी से काफ़ी कम समय में अपनी एक अलग पहचान बनाई। इतना ही नहीं, इसी क्रिप्टोकरेंसी की वज़ह से आज वे अरबों रुपयों के मालिक हैं। चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं…

ये 3 भारतीय हैं ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म Polygon के को-फाउंडर्स

हम बात कर रहे हैं, जयंती कनानी, संदीप नेलवाल व अनुराग अर्जुन की। यह तीनों ही ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म Polygon के को-फाउंडर्स हैं। पोलीगॉन जिसे पहले Matic कहा जाता था, उसे वर्ष 2017 में स्थापित किया गया था। ये इथेरियम ब्लॉकचेन पर बेस्ड है। इसकी सहायता से Decentralized Apps बनाए जाते हैं। आपको बता दें कि विश्व के दूसरे सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी इथेरियम (Ethereum) पर उच्च शुल्क व धीमी लेनदेन की परेशानी को दूर करने के लिए इसे तैयार किया था।

आसानी से किया जाता है इथेरियम स्केलिंग व इन्फ्रा डेवलपमेंट का कार्य

पॉलीगन प्लेटफॉर्म की सहायता से सरलतापूर्वक इथेरियम स्केलिंग व इन्फ्रा डेवलपमेंट का कार्य हो सकता है। इसके अलावा उपयोगकर्ता इसके द्वारा ऐप भी बना कर सकते हैं। पॉलीगॉन के मूल टोकन, Matic का मार्केट कैप वर्ष 2019 में की अपेक्षा $26 मिलियन से बढ़कर $14 बिलियन से हो गया है। इस क्रिप्टोकरेंसी में उन्हें 4-5 फीसदी तक हिस्सेदारी मिलती है। अभी की वैल्युएशन की बात करें तो उसके हिसाब से वे भारत के प्रथम क्रिप्टो बिलिनेयर बन गए हैं। गौरतलब है कि क्रिप्टो की दुनिया में डेटा को प्रूफ करना काफ़ी कठिन होता है, तथा सम्भवतः ऐसे दूसरे भी भारतीय भी होंगे, जिन्हें विशेष धन प्राप्त हुआ हो, जो सभी को पता ना हो।

कैसे की थी शुरुआत?

संदीप बताते हैं, ” मैं मूल तौर पर दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरे दूसरे दो को-फाउंडर मुंबई व अहमदाबाद के हैं। हमारा हेड ऑफिस बेंगलुरु में स्थित है। मैंने इंजीनियरिंग व कंप्यूटर साइंस से शिक्षा ग्रहण की है। फिर बाद में मैंने 2 वर्षों तक एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर कार्य किया। इसके बाद MBA की पढ़ाई पूरी करके IT में महारत प्राप्त की। फिर मैंने Deloitte में भी काम किया व इसके अलावा ई-काॅमर्स कंपनी Wellspun में काम किया, जहाँ पर मैं CTO था। उसके बाद फिर मैंने फ्लिपकार्ट की जैसी ही एक वेबसाइट शुरू की।

Artificial Intelligence व ब्लॉकचेन जैसी टेक्निक के बारे में पढ़कर बढ़ाया बिजनेस

इस बारे में आगे बताते हुए संदीप ने कहा, कि हालांकि जितना मैं चाहता था, मेरा बिजनेस उतना विस्तृत नहीं हुआ है। मैं ब्लॉकचेन इत्यादि नई टेक्निक्स के बारे में पढ़ने लगा। फिर मैंने पुनः प्रोग्रामिंग शुरू कर दी। इसके बाद मेरी मुलाकात जयंती कनानी व अनुराग अर्जुन (दूसरे 2 को-फाउंडर्स) से हुई। जयंती कनानी एक कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हैं तथा वे हाउसिंग डॉट कॉम के साथ डेटा साइंटिस्ट के तौर पर कार्य कर रहे थे। फिर बाद में उन्होंने गेम ऑफ थ्रोन्स (Game of Thrones) हेतु एक वायदा मार्केट (Prediction market) आदि एप्स तैयार करने का प्रयास किया। इसे वे ग्लोबल पेमेंट सिस्टम में चाहते थे।

दूसरी ओर, अनुराग अर्जुन एक सीरियल एंटरप्रेन्योर हैं। उस वक़्त वे IRIS के साथ मिलकर काम करते थे, जो की केंद्रीय बैंकों (Central Banks) जैसी संस्थाओं द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला सॉफ्टवेयर है। पूर्व में अर्जुन ने GST से सम्बंधित स्टार्टअप भी लॉन्च किया था। फिर संदीप ने बताया कि हमारे चौथे सह-संस्थापक मिहेलो बेजेलिक थे, जो सर्बियाई से हैं। उन्होंने मैटिक की तरह समाधान पर काम किया। जैसे ही उन्होंने मैटिक से पॉलीगॉन में रीब्रांड किया, पिछले वर्ष वे हमारे साथ जुड़े। इस प्रकार से हमारे बिजनेस में शुरू होने के बाद तरक्क़ी होती चली गयी।