जम्मू-कश्मीर की वादियों से लेकर प्रदेश की पहली महिला फाइटर पायलट बनने तक का सफर, जानिए माव्या की कहानी

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कहते हैं न जब हौसले बुलंद हो तो सपने ज़रूर ही पूरे होते हैं। ऐसी ही एक कहानी है देश की 12वीं महिला फाइटर पायलट माव्या सूदन की। माव्या जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के लंबेडी गांव की रहने वाली हैं। जम्मू-कश्मीर से माव्या पहली महिला हैं जिन्हे भारतीय वायुसेना में महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। माव्या अभी 23 साल की हैं और साल 2020 में उन्होंने वायुसेना की प्रवेश परीक्षा पास की थी। तेलंगाना की डुंडीगल वायुसेना अकादमी में हुई पासिंग आउट परेड में सिर्फ माव्या ही महिला पायलट के पद पर उपस्थित रहीं।

साकार किया बचपन का सपना

माव्या ने स्कूलिंग (10+2) जम्मू से की है। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ से अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। माव्या बचपन से ही होनहार थीं। माव्या का बचपन से ही सपना था कि वह एयरफोर्स में जाए और देश के प्रति खुद को समर्पित करें। उनकी माँ ने बताया कि माव्या बचपन से ही फाइटर पायलट बनकर प्लेन उड़ाने की बातें करती थीं।

गर्वान्वित है परिवार

माव्या के पिता विनोद सूदन ने अपनी बेटी की सफलता पर गर्व प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि माव्या पहले सिर्फ हमारी बेटी थी अब पूरे देश की बेटी है। माव्या की माँ सुषमा सूदन काफी खुश हैं अपनी बेटी की कामयाबी पर। इसके अलावा माव्या की बहन मान्यता जूनियर इंजीनियर हैं।