शाम ढ़लने के बाद नहीं जाता कोई राजस्थान के इस मंदिर में, जानिए क्या है रहस्य

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भारत में लाखों मंदिर स्थापित हैं, पर अभी भी उनकी कुल संख्या बता पाना मुमकिन नहीं है। हर मंदिर की अपनी ही खासियत है। कोई अपने ढांचों के लिए प्रसिद्ध है, तो कुछ मंदिर अपने इतिहास की वजह से मशहूर हैं। इतना ही नहीं यहाँ कई सरे ऐसे मंदिर भी हैं जो बहुत राहयस्यमई हैं। अपने रहस्य की वजह से ये मंदिर चर्चा में बने रहते हैं। देश के हर कोने में आपको ऐसे मंदिर के बारे में सुनने या पढ़ने को मिल जाएग।

आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के रहस्य के बारे में बताने जा रहें हैं। इस मंदिर में शाम होने के बाद लोग रुकना नहीं चाहते। क्या है ऐसा इस मंदिर में क्यों डरते हैं लोग यहां रुकने से !

कहाँ स्थापित है यह मंदिर

यह मंदिर राजस्थान के बाड़मेर जिले में है और इसका का नाम किराडू मंदिर है। इसकी मंदिर की बनावट दक्षिणी भारतीय तरीके से की गयी है। इसे राजस्थान के खुजराहो के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की वास्तुकला यहो की परंपरागत एवं बाहरी प्रभावों का मिश्रित रूप है। इसी वजह से किराडू दुनिया भर में मशहूर है। ऐसी मान्यता है कि 1161 में यह जगह ‘किराट कूप’ के नाम से प्रसिद्ध थी।

इस मंदिर को पांच शृंखलाओं में बनाया गया है, जिसमे भगवान शिव और भगवान विष्णु के मंदिर की स्थिति थोड़ी बेहतर है, अन्यथा मंदिर का बाकी हिस्सा अब लगभग खंडर हो चुका है। अभी तक यह नहीं पता चला है कि इसका निर्माण किसने करवाया था। मान्यता यह है कि गुप्त वंश, संगम वंश, या गुर्जर प्रतिहार वंश ने इसकी स्थापना की थी।

क्यों नहीं रुकते हैं लोग

इस मंदिर में लोग शाम ढ़लने के बाद रुकने से इसीलिए कतराते हैं क्योंकि लोगों का मानना है जो भी यहाँ शाम के बाद रुकता है वो पत्थर में तब्दील हो जाता है। यही डर लोगों के जहन में है कि अगर वो रुके तो कहीं पत्थर के न बन जाएं।

क्या है पत्थर बनने के पीछे का रहस्य – 

सालों से लोगों का कहना है कि कई साल पहले एक बार किराडू मंदिर में एक साधु अपने शिष्यों के साथ पधारे थे। वो अपने शिष्यों को मंदिर में छोड़ कर बाहर घूमने चले गए। उसी समय उनके एक शिष्य की तबियत बहुत बिगड़ गई। बाकी शिष्यों ने गांववालों से सहायता मांगी पर किसी ने मदद नहीं की। जब साधु लौटे तो गांव वालों के इस बर्ताव से क्रोधित होते हुए उन्होंने श्राप दे दिया कि शाम होने तक सभी गांव वाले पत्थर में परिवर्तित हो जाएंगे।

और दूसरी कहानी यह है एक स्त्री ने उन शिष्यों की सहायता की थी, इसीलिए साधु ने उसे गांव छोड़ कर जाने को कहा था। उन्होंने कहा था कि जाते वक्त पीछे मुड़ कर मत देखना, पर उस स्त्री ने पीछे मुड़कर देखा और वो पत्थर में तब्दील हो गई। उस महिला की मूर्ति को मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थापित किया गया है।