कभी किया करते थे होटलों में काम, आज है IAS ऑफिसर

0
127

कड़ी मेहनत और सच्ची लगन से सफलता ज़रूर हाथ लगती है।

प्रत्येक व्यक्ति के लिए सफलता पाने के और सफल बनने के अलग अलग मायने होते हैं। पर एक बात जिसपर सब सहमत होंगे। वो है खुद पर विश्वास। अगर आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे तो आप कभी सफल नहीं हो पाएंगे। तो आज आपसे ऐसी ही कहानी सरे करंगे एक व्यक्ति के बारे में, जिन्होंने खुद पर विश्वास किया और एक वेटर से लेकर आईएएस अधिकारी तक का सफर तय किया।

तो यह कहानी है के जयगणेश की। के जयगणेश तमिलनाडु के रहने वाले हैं। उन्होंने छः बार मैं UPSC की परीक्षा दी और असफल रहे पर उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। UPSC की सातवीं परीक्षा उनकी आखिरी उम्मीद थी इस बार उनके सितारे उनके साथ थे। अपने सातवें प्रयास में 156वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण हुए और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चुने गए।

जयगणेश के संगर्ष

जयगणेश का जन्म तमिलनाडु अम्बर के पास एक गांव के एक गरीब परिवार में हुआ। उनके पिता एक फैक्ट्री में काम करके किसी तरह परिवार को सँभालते थे। जयगणेश अपने भाई बहन में सबसे बड़े हैं। उनके 4 भाई बेहेन हैं। जयगणेश पढ़ने में शुरू से ही बहुत होशियार थे। उन्होंने बारहवीं की परीक्षा 91 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। इसके बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उनकी नौकरी एक कंपनी में लग गई, जहां उन्हें हर महीने 2500 रुपये तनख्वाह मिलने लगी।

2500 रुपए महीने मिलने पर गणेश को यह पता था कि इससे वो अपना परिवार नहीं चला सकते। इसीलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। इस रास्ते को चुनने के बाद भी उनका सफर आसान नहीं था। 6 बार असफल होने के बाद उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था और घर खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था। इतनी दिक्कतों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने एक होटेल में वेटर की नौकरी करनी शुरू कर दी। काम से लौटने के बाद उन्हें जितना भी समय मिलता उसमें वो पढ़ते।

गणेश भले ही यूपीएससी की परीक्षा में असफल हुए पर इस बीच उनका सेलेक्शन इंटेलीजेंस ब्यूरो में हुआ था। अब उनके सामने यह दुविधा थी कि वो नौकरी कर लें या सातवीं बार यूपीएससी की परीक्षा दें। उन्होंने फिर से यूपीएससी को चुना और इस बार उनकी मेहनत रंग लाई। सातवें प्रयास में उन्होंने 156वीं रैंक हासिल की। उनकी मेहनत रंग लाई। खुद पर विश्वास और निरंतर मेहनत ही उनकी सफलता की वजह बना।