कभी कहलाए जाते थे मोटे, अब जीता गोल्ड, जानिए नीरज चोपड़ा की कहानी

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टोक्यो ओलंपिक्स में भारत का प्रदर्शन सराहनिए है। आज ओलंपिक्स का 16वा दिन था, और आज ही के दिन भारत को मिला गोल्ड मेडल। जेवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता है। यह ट्रैक एंड फील्ड में भारत का पहला मेडल है वो भी गोल्ड मेडल है। सारे देश में इस समय खुशी से झूम रहा है। नीरज चोपड़ा के शानदार परफॉर्मेंस के बाद देश में और सोशल मीडिया पर जश्न का माहौल है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी नीरज को जीत पर बधाई दी। तो आइये आज आपको बताते हैं नीरज के बारे में विस्तार से।

नीरज का बचपन

नीरज मूल रूप से हरयाणा के रहने वाले हैं। 11-12 साल की उम्र में नीरज चोपड़ा का वजन 80 किलोग्राम हुआ करता था। जब वह कुर्ता पहनकर बाहर निकलते तो गांव के बच्चे उन्हें सरपंच कहकर चिढ़ाते थे। किसे पता था एक दिन बचपन का वही मोटा सरपंच दुनिया का सर्वश्रेष्ठ जैवलिन थ्रोअर बन जाएगा और पूरा देश उसपर गर्व करेगा। गोल्ड जीत कर नीरज ने इतिहास रच दिया है। 23 साक के नीरज अभिनव बिंद्रा के बाद व्यक्तिगत इवेंट में स्वर्ण जीतने वाले दूसरे हिंदुस्तानी बन गए।

हरियाणा की मिट्टी में पले-बढ़े नीरज देसी घी और दूध-दही के शौकीन थे। जब उनका वजन बेकाबू होने लगा तो घरवालों ने जबरदस्ती उन्हें मैदान भेजा। फिटनेस को ध्यान में रखने के लिए इन्हे पानीपत के शिवाजी स्टेडियम भेजा गया। फिटनेस पाने के लिए शिवाजी स्टेडियम में पहुंचे नीरज कब नया शौक लेकर घर आ गए उन्हें पता भी नहीं चला। मैदान पर उम्र से बड़े लड़कों को भाला फेंकते देखते हुए उनके मन में भी यह इक्षा जागी। वज़न कंट्रोल हुआ था उन्होंने जैवलीन पर भी हाथ आजमाया और उनका परफॉर्मेंसउनके सीनियर्स को पसंद आई। सीनियर्स को उनकी ताकत और नैसर्गिक प्रतिभा भी पसंद आ गई।

भारत को मिले इतने पदक

आपको बता दें नीरज ने क्वालीफिकेशन राउंड के पहले प्रयास में ही 86.65 मीटर के थ्रो के साथ फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। क्वालीफिकेशन में जिस तरह का प्रदर्शन किया और वह ग्रुप-ए में पहले स्थान पर रहे थे। जर्मनी के जोहानेस वेटेर जिन्हें गोल्ड का दावेदार माना जा रहा था उन्हें नीरज ने पीछे छोड़ दिया। अब तक भारत ने तोक्यो ओलिंपिक में एक गोल्ड, दो रजत और चार कांस्य सहित कुल सात पदक जीता है। रज के गोल्ड के अलावा, पीवी सिंधु और मीराबाई चानू ने सिल्वर जीता तो बजरंग पूनिया, रवि दहिया, लवलीना बोरगेहेन और भारतीय मेंस हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता।