8 हज़ार रूपए से शुरू की मशरुम की खेती, आज कमा रहीं हैं 80 हज़ार तक का मुनाफा

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भारत की लगभग 58% आबादी खेती से जुडी है। कई लोह पारम्परिक खेती में संतुष्ट हैं तो वहीं कुछ लोग एडवांस फार्मिंग के नुश्खे अपना रहें हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश की रहने वाली शिखा मशरूम की खेती में सफलता हासिल कर नए उदहारण पेश कर रहीं हैं। इन दिनों मशरूम की डिमांड मार्किट में बढ़ते जा रही है। किसी अन्य सब्ज़ी जैसा मशरूम भी अब बाज़ार में उपलब्ध रहता है और लोग इसे खरीदते भी हैं। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में इस खाद्य पदार्थ की खेती करना काफ़ी फायदेमंद साबित होता है।

तो चलिए हिमाचल प्रदेश की महिला किसान शिखा के बारे में जानते हैं। शिखा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले की रहने वालीं हैं। शिखा पेशे से किसान हैं, जो पारम्परिक (नार्मल) सब्ज़ियों के अलावा मशरूम उगाने का काम करती हैं। मशरुम की खेती से खुद शिखा की अच्छी खासी कमाई हो जाती है, इसके साथ ही दूसरी महिला किसानों को भी ट्रेनिंग देती हैं।ऐसा करके शिखा महिला शशक्तिकरण का अनोखा उदहारण पेश कर रहीं हैं।

अलग अलग सब्ज़ियाँ बेचने के साथ मशरूम की हर नस्ल की खेती करतीं हैं। शिखा व्हाइट बटन मशरूम से लेकर शिटाके मशरूम की अलग-अलग नस्लों की खेती करती-करती हैं, जिनकी बाज़ार में काफ़ी ज़्यादा मांग है। इस खेती से शिखा काफी ज्यादा मुनाफा कमा रहीं हैं। शिखा अच्छी क़्वालिटी वाले बेहतरीन मशरूम उगाती हैं, जिसके कारण उनके ग्राहकों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है।

खेती एवं मुनाफा
शिखा 8 हज़ार रुपए की लागत से मशरुम के बीज के 100 बैग ख़रीदा करतीं हैं। फिर उन्हें खेत में उगाकर फ़सल तैयार करती हैं। शिखा को हर बैग पर 2 हज़ार तक का फ़ायदा हो जाता है, इसीलिए 8 हज़ार रुपए ख़र्च करके शिखा को आसानी से 80 हज़ार रुपयों तक का मुनाफा हो सकता है। अछि क़्वालिटी मुशरून उगाने की वजह से शिखा को अपने मशरूम बेचने के लिए किसी प्रकार की मार्केटिंग नहीं करनी पड़ती है। कांगड़ा में उनके मशरूम काफ़ी ज़्यादा फेमस हो चुके हैं। कांगड़ा के लोग शिखा के घर से ही मशरूम खरीद कर ले जाते हैं, इसी वजह से उन्हें बाज़ार जाकर मशरूम बेचने की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

आपको बता दें शिखा बेरोज़गार युवाओं और महिलाओं को मशरूम की खेती की ट्रेनिंग भी देती हैं। जिससे वह घर पर ही अच्छी नस्ल का मशरूम उगा सके और अपने ख़र्च के लिए पैसे कमा सके। यही वज़ह है कि कांगड़ा में मशरूम की खेती करने वाले युवाओं और महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।