20 लीटर दूध से शरू किया ‘हैप्पी नेचर’, आज शहर भर में मशहूर हो गई है कंपनी

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आपने अब तक काफ़ी ऐसे प्रेरित करने वाली कहानियां सुनीं हैं जहाँ लोगों ने अपनी नौकरी छोड़ बिज़नेस खोलने का निर्णय लिया और सफल भी हुए। आज आपको दो दोस्तों के बारे में बतातें हैं जिन्होंने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। महज़ 20 लीटर दूध की सप्लाई करते हुए अब दिल्ली भर में फेमस हो गए हैं। ये सफलता है बचपन के दो दोस्त साहिल चोपड़ा और पार्थ वीरेंद्र की। पार्थ और साहिल दिल्ली के रहने वाले हैं। दोनों ने अपनी स्कूलिंग एक साथ कि थी, फिर अलग अलग कॉलेजों में इंजिनीरिंग की पढ़ाई की और उसके बाद एमबीए किया। अलग अलग जगहों से पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने देश विदेश की कई कंपनियों में प्रबंधन सलाहकार के पद पर नौकरी भी की। एक दूसरे से दूर रहने के बावजूद  दोनों सोशल मीडिया और अन्य तरीकों से जुड़े रहते थे। अक्सर दोनों बिज़नेस के बारे में एक दूसरे से बात किया करते थे। अलग अलग जगहों पर नौकरी करने से उन्हें बिज़नेस रिलेटेड काफ़ी जानकारी मिल गयी थी। साथ ही बिज़नेस फील्ड में कौन सा बिज़नेस उनके लिए कारगर साबित होगा इन सब चीजों की भी खोज उन्होंने शुरू कर दी थी।

काफी शोध के बाद साहिल ओर पार्थ का ध्यान मिल्क मार्किट के तरफ गया। उन्होंने देखा कि बाजार में किस तरह दूध की मांग बढ़ रही है कर दूध बेचने वाली कंपनियां ओर दूध वाले घोटाले और मिलावट कर रहें हैं। दोनों ने सोचा की अगर वो मिलावट मुक्त दूध का व्यवसाय करें और अच्छी क़्वालिटी का दूध बेचें तो हमारे लिए यह सफल साबित हो सकता है। साथ ही लोगों को इससे फायदा भी मिलेगा। उन्होंने काफ़ी सोच विचार करके अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ी और दूध का व्यवसाय करने का सोच लिया। ‘हैप्पी नेचर‘ के नाम से उन्होंने छोटे स्तर पर अपने कंपनी की शुरुवात की। अपने आस-पास के परिचितों को दिन में 20 लीटर दूध सप्लाई करने के साथ उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में पूंजी काफ़ी कम निवेश की गई थी इसलिए अधिकतर काम जैसे-गाय का देखभाल करना दूध सोर्सिंग करना, उनकी पैकेजिंग करना और डिलीवरी करने जैसे काम दोनों ख़ुद ही किया करते थे।

‘हैप्पी नेचर‘ द्वारा दी जा रही अच्छी सुविधाओं के कारण काफ़ी कम समय में ही काफ़ी लोगों को आकर्षित कर लिया। अभी फिलहाल पार्थ ओर साहिल की कंपनी दिल्ली में लगभग 2000 लीटर दूध और दूध उत्पादों की सप्लाई कर रही है। उन्होंने अपना ख़ुद का कैटल फॉर्म भी बना लिया है हर यहाँ गायों के रहने के साथ-साथ उनके लिए चारे भी उगाए जाते हैं।

हैप्पी नेचर के लिए ज़रूरी है हैप्पी गायें

उनका मानना है कि ‘हैप्पी नेचर’ की गाय को भी हैप्पी होना ज़रूरी है। इसके लिए वो हर संभव प्रयास भी करते हैं। उनका मानना है कि ‘हैप्पी गाय’ ही ‘हैप्पी मिल्क’ दे सकती है और इसीलिए वह हर संभव प्रयास करते हैं। इन दोनों दोस्तो ने बहुत लगन और मेहनत से अपना व्यवसाय स्थापित किया है। इसका परिणाम यह है कि आज उनका व्यवसाय काफ़ी आगे बढ़ते जा रहा है और अभी उनके कंपनी में बेकरी प्रोडक्ट्स भी बनने लगे हैं। दोनों दोस्त ‘हैप्पी नेचर’ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास में पूरी तरह से जुटे हुए हैं। हम उनको उनकी इस सफलता पर बधाई देते हैं और उनकी सफलता की कामना करतें हैं।