लोगों को पलायन से रोकने के लिए नौकरी छोड़ शुरू की मशरुम की खेती, अब कमा रहीं करोडों रुपए, जानिए मशरुम गर्ल की सक्सेस स्टोरी

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हमारे देश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच पलायन एक बहुत ही चिंतित करने वाला विषय है। हमारे देश में यह एक ऐसी समस्या है जिसका हल निकाल पाना भी कठिन है। बीते कई सालों से बिहार, झारखंड, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान व अन्य कई राज्यों के लोग काम न मिल पाने की वजह से पलायन करने पर विवश हो रहें हैं।

अपने राज्य में रोजगार न मिल पाने के कारण लोगों को राज्य छोड़ कर जाना पड़ रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं कुछ राज्यों में पर्याप्त रिसोर्सेज नहीं है तो कोई राज्य कुदरती मुसीबतों से परेशान है। जैसे कि राजस्थान की रेतीली जमीन पर कुछ उगा नहीं सकते और उत्तराखंड बाढ़ और बर्फबारी से घिरा होता है। उसी तरह यूपी-बिहार जैसे बड़े राज्यों रोजगार के लिए फैक्टरी-कंपनी की कमी है। ऐसे में ज़ाहिर है कि लोग वहाँ से पलायन कर संपन्न राज्यों की ओर चल देते हैं। पर ज़रूरी नही है कि उन सम्पन्न जगहों पर भी उनकी परेशानी कम हो। यह लोग यहाँ से तो मेहनत कर पैसे कमाने जाते हैं पर अक्सर अन्य राज्यों में इन्हें मजदूर बना दिया जाता है।

कोरोना महामारी के समय लगे लॉकडाउन से यह देखने को मिला था कि इन पलायन किए हुए लोगों एवं मजदूरों को अपने घर लौटने के लिए किस तरह से दर दर की ठोकरें खानी पड़ी थीं।
शहर में उन्हें रोजी-रोटी का संकट आ गया था और गाँव जाने के लिए रेल-बसें बंद थी। ऐसे मुशिकल समय में कठिन परिस्थितियों की देखते हुए उत्तराखंड की दिव्या रावत ने ऐसा कदम उठाने का सोचा जिससे वो पलायन को रोक सकें। अपनी इस पहल में उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसकी तारीफ मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रपति ने भी की।

कौन है दिव्या रावत

दिव्या उत्तराखंड की निवासी हैं और उन्होंने एमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन सोशल वर्क की डिग्री प्राप्त की है। दिव्या अपनी पढ़ाई के बात एक गैर सरकारी संस्था से जुड़ कर काम कर रहीं थीं। उन्हें इस संस्था में लोगों के मानवाधिकार के मसले पर जागरूक करने का काम करना होता था।

दिव्या के कार्यकाल के दौरान साल 2013 में बाढ़ आ गई थी और कई सारे लोग उससे प्रभावित हुए थे। उसके बाद आई महामारी से दिव्या बेहद परेशान हो गईं थीं। उन्होंने कुछ करने का सोचा और अपनी इस सोच से उन्होंने एक नया मुकाम हासिल कर लिया और बन गई मशरूम गर्ल ।

दिव्या ने अपने इस प्लान को शुरू करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने राज्य के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने की मुहिम शुरू की और मशरूम की खेती का काम शुरू किया। साथ ही उन्होंने फैसला किया कि वो मशरूम की प्रोसेसिंग यूनिट लगाएंगी। जिससे काम को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा सके।

महज़ 30 साल की उम्र में बनाई अहम पहचान

केवल 30 साल की दिव्या रावत आज ‘मशरूम गर्ल‘ के नाम से जानी जाती हैं। उत्तराखंड सरकार ने आज मशरूम का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया है। उनकी इस पहल से आज लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी प्राप्त हो रहा है। इतना ही नहीं दिव्या अब सालाना 5 करोड़ तक कि आमदनी कर रही है। साथ ही करीब 7 हज़ार किसानों को उनकी वज़ह से सीधा लाभ हो रहा है।