इस झील में भरा हुआ है कंकाल, जाने भारत के किस राज्य में है यह झील

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भारत में अजूबों की कमी एकदम नहीं है। देश के हर कोने से कुछ अजीब या रहस्यमयी चीज़ों के बारे में पता लगते ही रहता है। भारत में कई सारी रहस्यमयी घटनाये रहस्यमयी जगहों पर होते रहती हैं। कुछ उन्हीं रहस्यमयी जगहों में हहै एक अनोखा झील जो कंकालों से भरी हुई है।

यह राहयस्यमई झील हिमालय की चोटियों पर स्थित है और इसे रूपकुंड झील के नाम से जाना जाता है। इस झील को खास तौर पर यहां मौजूद कंकालों की वजह से पहचान मिली है। रूपकुंड झील भारत की सबसे ऊंची झीलों में सुमार है और यह झील समुद्र से 5000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

इतनी ऊंचाई पर होने के बावजूद इस झील के आस- पास कई कंकाल बिखरे नजर आते हैं इसलिए इसे कंकालों वाली झील भी कहते हैं। तो आइए आज जानते है क्या है इस झील का राज और कैसे ऐसी स्थिति निर्मित हुई…….

क्या है इसके पीछे का राज़

यूं तो इस झील के बारे में कई लोककथाएं हैं पर सबसे प्रसिद्ध कहानी है वहां के राजा के बारे में। बताया गया है कि राजा ने एक बार झील के पास बने नंदा देवी मंदिर जाकर दर्शन करने का सोचा। नंदा देवी को पहाड़ों की देवी माना जाता है, जब राजा पहाड़ चढ़ने निकले तो राजा के साथ उनके लिए काम करने वाले लोग भी उनके साथ गए। कहा जाता है पूरे रास्ते उन लोगो ने बहुत हुड़दंग मचाया जिससे नंदा देवी नाराज हो गईं और उन्होंने उन सब पर क्रोध में बिजली गिरा दी जिससे सभी की मौत हो गई, और ये उन सभी की कंकाले हैं।

तो वहीं कुछ लोग का मानना है कि यह हड्डियां महामारी की चपेट में आए लोगों की है। जो लोग महामारी के कारण मार गए थे ये उनकी हड्डियां हैं। वही कुछ लोग कहते हैं ये सेना के जवानों की हड्डियाँ है जिनकी मृत्यु बर्फ के तूफान में फसने से हुई थी। इन कंकालों का पता  पहली साल 1942 में पता चला था। कहा जाता है एक ब्रिटिश फॉरेस्ट गार्ड ने इसके बारे में सबको बताया था। लोककथाएं ऐसी भी है कि ये कंकाल जापान के सैनिकों का हो सकता है। ऐसा माना गया कि जो सैनिक दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वहां से गुजर रहे थे वह बर्फ की चपेट में फस कर वहीं मर गए होंगे।

कितनी पुरानी हैं यह हड्डियां

बीते कई सालों से वैज्ञानिक इन हड्डियओं पर रिसर्च कर रहे हैं। उनकी रिसर्च से यह पता चलता है कि यह सभी कंकाल एक देश के नहीं हैं। यह भारत और उसके आस- पास के देशों के हैं। कुछ कंकाल को ग्रीस और साउथ ईस्ट का बताया गया है। यह सारे कंकाल वहां एक समय पर नहीं आए हैं ऐसा बताया जाता है कि भारत और उसके पास के इलाकों के कंकाल 7वीं से 10वीं शताब्दी में वहां आए थे, ग्रीस और अन्य इलाकों के कंकाल 17वीं से 20वीं शताब्दी में वहां आए थे। हालांकि अभी तक यह बात साफ नहीं हो पाई है की इन लोगों की मौत का कारण क्या था। पर यह बात शोध में साफ कर दी गई है कि यह किसी महामारी से नहीं मरे। सिर्फ लोगों द्वारा इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी मृत्यु बर्फ में दबने से हुई होगी।