योगी सरकार ने लखीमपुर को लेकर बदल ली रणनीति, जानिये परदे के पीछे की कहानी

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पहली वजह लखीमपुर हिंसा की जांच के लिये 6 सदस्यों की एसआईटी टीम का गठन कर दिया गया है, इस मामले की न्यायिक जांच कमेटी का गठन हो गया है।

New Delhi, Oct 06 : लखीमपुर खीरी हिंसा मामले को लेकर यूपी की योगी सरकार ने बुधवार को अपनी रणनीति में बदलाव किया है, कल तक जहां विपक्षी दलों के नेताओं को जाने से रोका जा रहा था, वहीं बुधवार को यूपी प्रशासन ने सभी नेताओं फिर चाहे वो कांग्रेस से हो, या फिर आप सांसद संजय सिंह हो, सभी विपक्ष के नेताओं को लखीमपुर जाने की इजाजत दे दी है, बताया जा रहा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी लखीमपुर जा सकते हैं, आखिर ऐसा क्या हुआ जो बुधवार आते-आते यूपी सरकार ने सभी नेताओं के लिये लखीमपुर जाने के रास्ते खोल दिये हैं।

जानें क्या हैं वो वजह
पहली वजह लखीमपुर हिंसा की जांच के लिये 6 सदस्यों की एसआईटी टीम का गठन कर दिया गया है, इस मामले की न्यायिक जांच कमेटी का गठन हो गया है।
दूसरी वजह लखीमपुर हिंसा में मारे गये 3 किसानों का अंतिम संस्कार मंगलवार को ही हो चुका था, जबकि हिंसा में जान गंवाने वाले बहराइच के किसान गुरविंदर सिंह का बुधवार सुबह अंतिम संस्कार किया गया, इससे पहले परिजन की मांग पर उनकी शव का दूसरी बार पोस्टमॉर्टम किया गया, पोस्टमॉर्टम की निगरानी के लिये डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ पैनल लखनऊ से आया था, इस पैनल के निर्देशन में ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जारी की जाएगी।

तीसरी वजह ये है कि हिंसा में मरने वाले सभी किसानों को यूपी प्रशासन तथा किसान नेता राकेश टिकैत के बीच हुए समझौते के मुताबिक 45-45 लाख मुआवजा राशि भी प्रशासन की ओर से दे दी गई है, साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की भी बात है।

चौथी वजह ये है कि मामले में पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसमें आशीष मिश्रा का भी नाम है, ashish mishra (1) एफआईआर के अनुसार घटना के दिन आशीष मिश्रा अपनी थार गाड़ी में बायीं ओर बैठा था, इतना ही नहीं एफआईआर में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को भी साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।