भारत एवं 35 अन्य देश मिलकर बना रहे हैं पृथ्वी का सूरज , जानिए सत्रह खरब वाले इस सूरज की विशेषता

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दोस्तों आपको बता दें कि भारत सहित अन्य 35 देशों ने मिलकर एक खास तरह के उपकरण को बनाने की तैयारी जारी की है। यह उपकरण पृथ्वी पर ही मौजूद रह करके सूरज की समान ही ऊर्जा का निर्माण करेगा। इससे भविष्य में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। इस मशीन को अकेले भारत नही बल्कि भारत के अतिरिक्त अन्य 35 देश मिल कर बना रहे हैं।

10 वर्षों से जारी है काम

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बता दें कि साइंटिस्ट पिछले 10 वर्षों से इस उपकरण को निर्मित करने के प्रयास में जुटे हुए हैं। एक खास तरीके के मैग्रेट को तैयार करना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती है। यह विशाल काम उपकरण इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर का ही एक हिस्सा है। इस मैग्रेट को सेंट्रल सोलेनॉयड का नाम प्रदान किया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह विशेष तरह का मैग्रेट प्लाज्मा में एक बेहद ऊर्जावान विद्युत को प्रवाहित करने में सहायक होगा। और इससे ही स्वच्छ ऊर्जा निर्मित होगी।

होगा प्रदूषण रहित

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अगर हम इसमें समाहित ऊर्जा के बारे में बात करें तो हाइड्रोजन प्लाज्मा को 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जा सकेगा। और यह सूर्य के अंदर के भाग से दस गुना ज्यादा गर्म होगा। इस उपकरण में ग्रीनहाऊस गैस का भी उत्सर्जन होगा। और रेडियोएक्टिव पदार्थ भी इस दौरान नही निकलेगा। जिससे कि प्रदूषण में बहुत हद तक कमी आएगी। इन सभी विशेषताओं के कारण ही इसे पृथ्वी का सूरज कहा जा रहा है।

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बता दें कि इस कि लम्बाई 59 फ़ीट एवं रेडियस एक फ़ीट है। और इसका कुल वजन 1000 टन के लगभग होगा। इस का मैग्रेट फील्ड धरती के मैग्रेटिक फील्ड से 2 लाख 80 गुना तक अधिक शक्तिशाली है। इसका निर्माण अमेरिका के कैलिफोर्निया में हो रहा है। अनुमान है कि इसी साल 2023 तक इसी फ्रांस में इंस्टाल कर दिया जाएगा। और साल 2025 तक यह ऊर्जा को निर्मित करने लगेगा ऐसी संभावना है। इस के निर्माण में 25 बिलियन डॉलर्स का खर्च सम्भावित है। जो की भारतीय मुद्रा के अनुसार 17 खरब है।