MBBS करके बनी डॉक्टर फिर गांव के विकास के लिए छोड़ी नौकरी बन गई सरपंच

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भारत के अधिकतर आबादी गांव में निवास करती है जहां गांव में लोग खेती करके अपना जीवन यापन करते हैं। आज के समय देखा जाए तो महिलाएं हर जिम्मेदारी में आगे आ रही हैं चाहे वह घर की देखभाल करना हो या फिर बाहर का कोई भी काम हो। पढ़ाई और खेल को लेकर भी आजकल महिलाएं काफी आगे बढ़ रही हैं।

सामान्य तौर पर देखें तो भारत दो भागों में बटा हुआ दिखाई देता है जहां एक तरफ शहर के लोग और दूसरी तरफ गांव के लोग। अधिकांश लोगों का मानना है कि शहर में पढ़ने वाले बच्चे गांव के परिवेश में नहीं रह सकते हैं तथा शहर में पढ़ने वाली लड़कियां मॉडर्न और नखरे वाली होती हैं जो गांव की परिभाषा तक नहीं जानती हैं। इस बात को गलत साबित किया है एक महिला ने इसने एमबीबीएस की परीक्षा पास कर शहर से गांव की ओर रुख किया और गांव की सेवा करने के लिए वहीं रहकर गांव की सरपंच बन गई।

राजस्थान के भरतपुर जिले के एक छोटे से गांव कामा की रहने वाली 24 वर्षीय शहनाज खान शहर में पली-बढ़ी हैं। शहनाज ने अपने गांव में बहुत कम रह कर गांव की समस्याओं को समझा है। लेकिन जब वह समझदार हुई तो एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद गांव में रहकर ही गांव की सेवा करना उचित समझा। इसके बाद वह डाउनलोड करा दी और सरपंच के चुनाव में 195 वोटों से जीत कर सरपंच बनी है। शहनाज पूरे गांव की कायापलट करना चाहती हैं और गांव में हर एक सुख सुविधा उपलब्ध करवाना चाहती है।

राजस्थान में काफी क्षेत्रों में यह मान्यता है कि लड़कियां केवल घर का कार्य कर सकती हैं और उन्हें काफी लोग तो पढ़ाई करने के लिए भी नहीं जाने देते हैं। महिलाओं को घर के चारदीवारी के अंदर ही सुरक्षित समझा जाता है लेकिन शहनाज खान ने इस रिवाज को गलत साबित कर दिया। अपने मेहनत और आत्मविश्वास के साथ मात्र 24 वर्ष की उम्र में अपने गांव के सरपंच भर पर उन्होंने एक इतिहास रचा है जिससे आने वाले समय में काफी महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी।

शहनाज ने बताया कि वह सबसे पहले अपने गांव में शिक्षा के स्तर को सुधारना चाहती हैं वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और सर्व शिक्षा अभियान के प्रति गांव के लोगों को जागरूक करना चाहती है। जिससे गांव में सभी बेटियों को उचित शिक्षा प्राप्त हो पाए और वह अपने जीवन में हर एक ऊंचाई को हासिल करने में सक्षम हो। शहनाज के इस प्रयास की चारों तरफ काफी प्रशंसा की जा रही है।