बंद कमरे में जमीन पर बेसुध पड़े मिले संजीव कुमार, जब सचिन ने सुनाया था एक्टर के अंतिम समय का किस्सा

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हिंदी सिनेमा में कई कलाकार आते है शोहरत और ग्लैमर की खोज में, उन्हीं में से कुछ कलाकर के गुमनामी, तन्हाई या गरीबी के कारण जिंदगी असमय ख़त्म हो गई। वहीं कुछ कलाकार की मौत अभी भी रहस्य हैं। आज हम बात कर रहे है, अपने समय के महान अभिनेता संजीव कुमार की मौत के बारे में। सचिन पिलगाओंकर ने खुद अपने इंटरव्यू के जरिए सुनाया था इस एक्टर के अंतिम समय का किस्सा।

जब सचिन को जरा भी अंदाजा नहीं था यह उनकी संजीव कुमार से आखिरी मुलाकात होगी

एक बार संजीव कुमार ने सचिन को अपने घर सुबह सुबह मिलने को बुलाया, लेकिन सचिन के बिजी और किसी काम में फंसे होने के कारण वे उनसे मिलने तय समय पर नही जा पाए। उनको क्या पता था, यह उनकी संजीव कुमार से आखरी मुलाकात होगी, पर दुख तो इस बात का है की वे संजीव कुमार से आखिरी बार भी नहीं मिल पाए थे।

संजीव कुमार और सचिन पिलगाओंकर की दोस्ती बहुत पक्की थी

बॉलीवाड में दोस्ती के कई किस्से सुने है, रील लाइफ में हो, या रियल लाइफ में सब की अपनी लोकप्रियता हैं। उन्हीं में से एक संजीव कुमार और सचिन पिलगाओंकर की दोस्ती। उम्र में काफी अंतर होने के बावजूद संजीव कुमार और सचिन पिलगाओंकर की बहुत पक्की दोस्ती थी। सचिन संजीव कुमार से भले ही छोटे थे, पर दोनों ही एक्टर अपने दिल की बातें एक दूसरे से शेयर किया करते थे।

सचिन ने बताया संजीव कुमार से की गई लास्ट बातचीत के बारे में

सचिन ने बॉलीवुड आज और कल के वीडियो के द्वारा बताया संजीव कुमार से की गई लास्ट बातचीत के बारे में ‘मैं उनसे मिलने उनके घर ही गया था। दरअसल, एक दिन पहले मैं उनसे मिला था, तब वह डबिंग कर रहे थे। तो मैंने कहा कि मैं कल मिलना चाहता हूं, तो उन्होंने कहा सुबह आजा। तो मैंने कहा नहीं मैं दो-ढा़ई बजे के बीच में आता हूं। उन्होंने कहा कि थोड़ा जल्दी नहीं आ सकता! तो मैंने कहा- भैया थोड़ा सा काम है तो मैं वो करके आ जाता हूं। तो उन्होंने कहा ठीक है।’

जब सचिन को संजीव कुमार के बाथरूम में ज्यादा देर लगने पर शक हुआ

सचिन ने आगे बताया ‘मैं उनके घऱ दो ढाई बजे के बीच पहुंच गया। मैंने पूछा कहां हैं, तो बताया गया कि कमरे में हैं, बाथरूम में नहा रहे हैं। आधा घंटा मैं रुका, मैंने पूछा क्या हुआ तबीयत ठीक नहीं है क्या उनकी?तो बताया गया हां, ठीक नहीं हैं, उनके सेक्रेटरी डॉक्टर को लाने गए हैं। फिर कुछ देर बाद जमनादास जी आए डॉ गांधी को लेकर तो मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ? तो वो बोले कि उन्हें उल्टी हुई औऱ बल्गम सी निकली और रात काफी लेट हो गए थे। शायद तीन या चार बजे सुबह आए हैं। तो मैंने ऐसे कहा कि तबीयत ठीक नहीं है फिर भी लेट नाइट काम कर रहे हैं क्या है ये? मैंने कहा मिलूंगा तो डांटूंगा उनको। वो मेरे फ्रेंड, फिलॉसिफर और गाइड थे तो हम ऐसा बॉन्ड शेयर करते थे। ऐसी कोई बात नहीं थी जो हम एक दूसरे के साथ शेयर नहीं कर सकते थे। फिर भी मैं आधा घंटा और रुका डॉक्टर भी बाहर भी बाहर थे, मुझे थोड़ा सा शक हुआ कि क्या इतना देर तो नहीं करते कभी’।

अंदर जाकर सचिन ने देखा संजीव कुमार दरवाजे की तरफ हाथ कर के उल्टे कार्पेट पर पड़े हुए थे

आखिर वह समय आ ही गया, जब सचिन ने कुछ ऐसा देखा जो उन्हें विश्वास नही हुआ, सचिन ने इसके बारे में कुछ इस तरह बताया, ‘कोई भी अंदर जाने से डर रहा था, कोई तैयार नहीं था अंदर जाने के लिए। मैंने सोचा कि मैं जाता हूं ऐसा क्या होगा ज्यादा से ज्यादा चेंज ही कर रहे होंगे। तो सॉरी कह दूंगा दरवाजा बंद कर दूंगा। मैं उनके बेडरूम की तरफ बढ़ा, उनके कमरे का स्लाइडिंग डोर था। तो मैंने उसे ओपन किया। सामने तो कोई नहीं दिखा पर नीचे कार्पेट पर दो पैर नजर आए। मैंने आगे आकर देखा तो वो दरवाजे की तरफ हाथ कर के उल्टे कार्पेट पर पड़े हुए थे। ये देख मैं जोर से चिल्लाया। मैंने डॉक्टर को बुलाया जल्दी आओ। डॉक्टर आया उनके पास बैठा और उन्हें उल्टा किया, छाती पर पंप दिया। डॉक्टर ने बताया कि काफी देर पहले ही ये चले गए। मेरे पैरों तले जमीन निकल गई थी। वह सिर्फ 46 के थे।’