गुजरात तो सिर्फ झांकी है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है, अब इन राज्यों में भी सीएम बदल सकती है बीजेपी

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बीजेपी हाईकमान ने तीन महीनों में उत्तराखंड, कर्नाटक और अब गुजरात के मुख्यमंत्री बदले हैं, उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में चुनाव हैं।

New Delhi, Sep 13 : बीजेपी नेतृत्व ने बीते 3 महीने में अपने 3 राज्यों के सीएम बदलकर भावी राजनैतिक तैयारियों के लिये बड़े बदलाव के संकेत दिये हैं, जल्द ही कुछ और राज्यों में भी बदलाव हो सकता है, दरअसल पार्टी नेतृत्व को जो फीडबैक मिल रहा है, वो उतना अच्छा नहीं है, जिसकी वो उम्मीद कर रहे थे, ऐसे में कमजोर विपक्ष के बावजूद पार्टी की रणनीतिक चिंता बरकरार है, वो उन्हें समय रहते हल कर लेना चाहती है।

तीन सीएम बदले
बीजेपी हाईकमान ने तीन महीनों में उत्तराखंड, कर्नाटक और अब गुजरात के मुख्यमंत्री बदले हैं, उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में चुनाव हैं, पार्टी रणनीति के अनुसार वहां पर पुराने नेतृत्व के साथ जरुरी चुनावी तैयारियां नहीं कर पा रही थी, ऐसे में वहां पर तो एक साल में 3 सीएम बदले गये हैं, bjp meeting कर्नाटक में भी पार्टी ने अपने सबसे बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा को बदल दिया है, ताकि भविष्य की मजबूत जमीन तैयार की जा सके, अब गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन कर साफ कर दिया है कि वो अपनी भावी रणनीति को लेकर बेहद संजीदा हैं, इसमें किसी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं हैं।

2024 चुनाव मिशन
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी नेतृत्व की असली चिंता 2024 लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं, पार्टी उनमें अपना प्रदर्शन मजबूत रखना चाहती है, ताकि 2024 की मजबूत बुनियाद खड़ी हो सके, modi shah विभिन्न स्थानों से पार्टी ने जो फीडबैक हासिल की है, उसके मुताबिक कोरोना काल के दौरान लोगों की दिक्कतें बढी है, मौजूदा राज्यों के नेतृत्व को लेकर ये नाराजगी कहीं कम तो कहीं ज्यादा है, इसका विपरीत असर चुनाव पर पड़ सकता है, ऐसे में पार्टी नये नेताओं के साथ नई तैयारियों के जरिये जनता के बीच जाना चाहती है और उसका विश्वास जीतना चाहती है।

क्यों बदला गया गुजरात का सीएम
सूत्रों के मुताबिक पार्टी की समीक्षा में जिन राज्यों की रिपोर्ट अच्छी नहीं है, उनमें एमपी, हरियाणा और त्रिपुरा जैसे राज्य शामिल हैं, जहां उनकी सरकार है, इनमें एमपी में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी को चुनाव में जाना है, त्रिपुरा में नेतृत्व पर लगतारा सवाल खड़े हो रहे हैं, पार्टी की दिक्कतें कम नहीं हो पा रही है, हरियाणा में भी कमोबेश यही स्थिति है, वहां के सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर बीजेपी ने गैर जाट राजनीति को आगे बढाया है, लेकिन नेतृत्व को लेकर दिक्कत बनी हुई है।