वो महिला जिसने ठुकरा दिया था सिंधिया का रिश्ता, सैंडल में जड़वाती थी हीरे-मोती

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महारानी इंदिरा देवी बेहद खूबसूरत और फैशनपरस्त थीं, रानी को बनने संवरने का बेहद शौक था, विदेशी फैशन के भी वो लगातार टच में रहती थी, जयपुर की मौजूदा महारानी गायत्री देवी उनकी बेटी हैं।

New Delhi, Sep 15 : देश में कई राजघराने ऐसे हैं, जिनके किस्से कहानियां ऐसे हैं, कि उस पर यकीन ही ना हो, ऐसी ही एक राजकुमारी रही हैं, जो अपने जूतों में हीरे मोती जड़वा कर पहना करती थी, बड़ौदा राजघराने में पैदा हुआ इस राजकुमारी का नाम इंदिरा देवी था, बाद में कूच बिहार की महारानी बनी, हालांकि उनके पास सिंधिया राजघराने की महारानी बनने का भी मौका था, लेकिन उन्होने ज्योतिरादित्य सिंधिया के परदादा से शादी का रिश्ता ठुकरा दिया था, आइये आपको इंदिरा देवी से जुड़ी कुछ रोचक बातें बताते हैं।

खूबसूरत और फैशनपरस्त
महारानी इंदिरा देवी बेहद खूबसूरत और फैशनपरस्त थीं, रानी को बनने संवरने का बेहद शौक था, विदेशी फैशन के भी वो लगातार टच में रहती थी, जयपुर की मौजूदा महारानी गायत्री देवी उनकी बेटी हैं। इटली के साल्वातोर फेरोगेमो उनके पसंदीदा वेस्टर्न डिजाइनर्स में से एक थे, साल्वातोर फेरोगेमो 20वीं सदी की सबसे चर्चित डिजाइनर कंपनी मानी जाती थी। आज भी इस कंपनी के लग्जरी शो-रुम पूरी दुनिया में हैं।

रोचक किस्सा
साल्वातोर ने अपने बायोग्राफी में महारानी इंदिरा देवी से जुड़ा बेहद रोचक किस्सा शेयर किया है, बकौल साल्वातोर एक बार महारानी ने उनकी कंपनी को 100 जोड़ी जूते बनाने का ऑर्डर दिया था, साथ ही एक ऐसी सैंडल बनाने को कहा था, जिसमें हीरे और मोती जड़े हों। साल्वातोर ने बताया कि महारानी इंदिरा देवी को अपनी सैंडल में हीरे मोती अपने कलेक्शन के लिये ही चाहिये थे, इसलिये उन्होने अपने ऑर्डर के साथ अपनी पसंद के हीरे-मोती भी भेजे थे, महारानी की एक ऐसी ही हीरे-मोती जड़ित सैंडिल साल्वातोर म्यूजियम में भी रखी हुई है।

कूच बिहार के महाराजा से शादी
महारानी इंदिरा की शादी कूच बिहार के महाराज जितेन्द्र नारायण से हुई थी, हालांकि इंदिरा देवी की सगाई बचपन में ही ग्वालियर के होने वाले राजा माधो राव सिंधिया से पक्की हो चुकी थी, बाद में इंदिरा ने इस शादी से इंकार कर दिया। बता दें कि माधो राव सिंधिया दिवंगत पूर्व केन्द्रीय मंत्री माधव राव के दादा तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया के परदादा थे। माधो राव ने ही देश के सबसे नामी स्कूलों में से एक ग्वालियर के द सिंधिया स्कूल की शुरुआत की थी।