अलगाववादी नेता गिलानी के आखिरी वीडियो से पाकिस्तान शर्मसार, मौत से पहले बनाया था वीडियो

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गिलानी के निधन के बाद आईएसआई की कोशिश है कि मसरत आलम को उनका उत्तराधिकारी प्रोजेक्ट करे, तथा राजनीतिक उत्तराधिकारी के रुप में आगे बढाएं।

New Delhi, Oct 06 : जम्मू-कश्मीर के दिवंगत अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत से कुछ दिन पहले का एक वीडियो पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिये शर्मिंदगी का कारण बन गया है, दरअसल गिलानी की सितंबर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था, उन्होने अपनी मौत से कुछ दिन पहले ही अब्दुल्लाह गिलानी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, वहीं आईएसआई की कोशिश थी कि वरिष्ठ अलगाववादी नेता गिलानी मसरत आलम को अपना उत्तराधिकारी घोषित करें।

वीडियो जारी
शीर्ष खुफिया सूत्रों का दावा है कि मौत से कुछ दिन पहले का गिलानी का वीडियो तैयार किया गया था, और इसे सोमवार को जारी किया गया है, इस वीडियो को पाक के शीर्ष नेताओं और पत्रकारों ने जारी किया है, सूत्रों के पुख्ता जानकारियों के आधार पर कहा गया है कि आईएसआई हेडक्वार्टर गिलानी के इस वीडियो से खुश नहीं हैं, और कहा है कि उसके अधिकारियों ने मामले को ठीक से हैंडल नहीं किया, इस बारे में पाक एजेंसी ने भी रिपोर्ट मंगाई है।

मंसूबों पर पानी फेर दिया
गिलानी के निधन के बाद आईएसआई की कोशिश है कि मसरत आलम को उनका उत्तराधिकारी प्रोजेक्ट करे, तथा राजनीतिक उत्तराधिकारी के रुप में आगे बढाएं, लेकिन गिलानी के वीडियो ने आईएसआई के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। 5 सितंबर को सैयद अली शाह गिलानी के उत्तराधिकारी के रुप में मसरत आलम के नाम की घोषणा की जानी थी, उससे एक दिन पहले कोवर्ट एक्शन डिवीजन ने अब्दुल्ला गिलानी के इस्लामाबाद स्थित आवास पर छापा मारा, उनसे कहा कि ये वीडियो जारी ना करें, आशंका इस बात की है, कि अब्दुल्लाह गिलानी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पाक का पक्षधर
गिलानी की मौत के बाद मसरत आलम को ऑल पार्टीज हुर्रियत कांफ्रेंस या तहरीके हुर्रियत का चेयरमैन घोषित किया गया है, श्रीनगर में हुर्रियत की ओर से जारी बयान में कहा गया, हमारे लाइफटाइम चेयरमैन गिलानी और वरिष्ठ नेता मुहम्मद अशरफ सहराई की मौत के बाद ऑल पार्टीज हुर्रियत कांफ्रेंस के लिये क्षति की भरपाई कर पाना संभव नहीं है, हालांकि हुर्रियत लीडरशिप के सामने खड़ी चुनौतियों और उसकी भूमिका को देखते हुए मसरत आलम को हुर्रियत का नया चेयरमैन चुना गया है। आपको बता दें कि मसरत आलम जम्मू-कश्मीर के पाक में विलय का पक्षधर था, हालांकि मौजूदा समय में वो नई दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में बंद है, 1990 के बाद से लगातार 2 दशक से जेल में है, उसे आखिरी बार 17 अप्रैल 2015 को श्रीनगर में गिलानी के स्वागत में आयोजित रैली में पाक समर्थिक नारे लगवाने और पाक का झंडा फहराने को लेकर गिरफ्तार किया गया था।