एक ट्रेन ड्राइवर को कितनी मिलती है सैलेरी और कितने घंटे करते है वो काम

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हम अक्सर ही अपने आस-पास की और ऐसी चीज़ों से बिलकुल अनजान होते है, जो की बहुत ही साधारण होते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही साधारण बात बताने जा रहे हैं। जो है तो बहुत ही कॉमन। पर शायद आप इसके बारे में नहीं जानते होंगे। आइये जाने यह रोचक बात..

क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि ट्रेन चलाने के लिए एक ड्राइवर (Train Driver) को कितना अटेंटिव रहना पड़ता है ? 24 घंटे दिन-रात एक करके ट्रेन चलाने वाले ड्राइवर को ऑफिशियली टर्म में हम ‘लोको पायलट’ कहते हैं। ट्रैन के इन लोको पायलट (Loco Pilot) का कार्य बहुत ही कठिन होता है।

सर्दी हो, या गर्मी बरसात या किसी भी प्रकार का कोई त्यौहार ही क्यों न हो यह लोको पॉयलेट हमेशा ही अपनी ड्यूटी पर सावधान रहते हैं। इसका कारण यह भी है कि उनकी एक छोटी सी गलती से भी हजारों लोगों की जान जा सकती है। तो चलिए अपनी इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताये कि इतना श्रम करने वाले लोको पायलेट आखिर कितनी तनख्वा कमाते हैं। और इन पायलेट्स को किन-किन कठिनायिओं का सामना करना पड़ता है।

एक लोको पायलट की जॉब इतनी संकटमय और उत्तरदायी होती है कि इसमें चूक की संभावना बिल्कुल ही जीरो के बराबर होती है। लोको पायलेट चलती ट्रेन के दौरान बहुत ही सावधान रहता है। इसीलिए इन पायलेट्स का वेतन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से भी अधिक होता है। 24 घंटे कार्य करने वाले इन लोगों की डेली रूटीन निश्चित नहीं होती है। इन लोगों को 14 दिनों का रोस्टर दिया जाता है, जिनमें से केवल 2 ही रेस्ट दिए जाते हैं। इन्हे लगभग 104 घंटे काम करना होता है। फिर भी इन्हे इससे अधिक ही काम करना पड़ जाता है।

एक लोको पायलट एक बार घर से निकलने के बाद फिर पर 3-4 दिनों बाद ही वापस अपने घर जा पाता है, जिस कारणवश इनके पारिवारिक जीवन में भी बहुत कठिनाई हो जाती है। एंट्री लेवल पर आने के बाद लोको पायलेट का पोस्ट असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) होता है, यह 7th कमिशन के लेवल 2 पर आते हैं। इनकी कठिन ड्यूटी के कारण ही रेलवे विभाग ने इन्हें बहुत सारी चीज़ों के लिए अलावुड किया हुआ है। इन्हे 100 किमी के ट्रेन रनिंग पर अलाउंस मिलता है। अपनी ड्यूटी के 14 दिनों में 104 घंटों से अधिक का ओवरटाइम करने का भी इन्हे पैसा दिया जाता है।

एक लोको पायलट को नाइट ड्यूटी अलाउंस, हॉलीडे अलाउंस, ड्रेस और लीव अलाउंस भी मिलते हैं। इन सबको जोड़कर एंट्री लेवल के लोको पायलट को बहुत अच्छी सैलरी मिलती है। जब ये ALP प्रमोट होकर सीनियर लोको पायलट बन जाते हैं तो कई बार इनकी सैलरी एक लाख रुपए से भी अधिक तक की हो जाती है। वेतन अधिक होने का कारण है उनकी कठिन ड्यूटी। इतना श्रम करने के बाद यदि इनकी सैलरी एक साधारण व्यक्ति जितनी होगी, तो फिर लोको पायलेट बनने की चाह कोई भी नहीं रखेगा। आपको यह जानकारी भारतीय रेलवे के एक पुराने सर्कुलर के आधार पर दी गई है, और इसमें लोको पायलट के सभी कैटेगरी के पे-ग्रेड को समझा जा सकता है।