मनीष गुप्ता केस- इंस्पेक्टर ने मारा था पहला थप्पड़, SIT के सामने चश्मदीद ने बताया क्या हुआ था

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कानपुर में एसआईटी टीम को बयान देने पहुंचे हत्याकांड के चश्मदीद मनीष के दोस्त हरवीर सिंह ने कहा कि मारपीट पहले दरोगा अक्षय मिश्रा और थानेदार जेएन सिंह ने शुरु की थी।

New Delhi, Oct 07 : कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में चश्मदीद हरवीर सिंह ने अहम खुलासा किया है, आजतक न्यूज चैनल से बात करते हुए हरवीर ने कहा कि होटल में कमरा खुलवाने पर मारपीट की शुरुआत पहले दरोगा अक्षय और जेएन सिंह ने की थी, अक्षय ने पहले मुझे थप्पड़ मारा, फिर जेएन सिंह ने मनीष को थप्पड़ मारा था।

चश्मदीद ने क्या कहा
कानपुर में एसआईटी टीम को बयान देने पहुंचे हत्याकांड के चश्मदीद मनीष के दोस्त हरवीर सिंह ने कहा कि मारपीट पहले दरोगा अक्षय मिश्रा और थानेदार जेएन सिंह ने शुरु की थी, हरवीर ने घटना के बारे में बताते हुए कहा कि होटल में चेकिंग करने पहुंची पुलिस ने मारपीट पहले दरोगा अक्षय मिश्रा और जेएन सिंह ने शुरु की थी। Manish Gupta (1) उन्होने कहा कि अक्षय ने पहले मुझे थप्पड़ मारा, फिर जेएन सिंह ने मनीष को मारा, इसके बाद पुलिसवाले कमरे में घुस आये और मारने लगे, हरवीर ने ये भी बताया कि मनीष का कमरा मैंने खुलवाया था, हरवीर का कहना है कि सरकार कदम उठा रही है, लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

एसआईटी ने क्या-क्या पूछा
पूछताछ के दौरान एसआईटी ने हरवीर से पुलिस के होटल में आने, कमरे का दरवाजा खटखटाने और उसको एक सिपाही द्वारा कमरे से बाहर जबरन ले जाने के पूरे घटनाक्रम का बयान दर्ज किया, हरवीर के साथ प्रदीप सिंह से एसआईटी ने पूछताछ की, manish murder case (4) कि कमरे में घुसते ही पुलिस ने किस तरह का बर्ताव किया, फिर बेड पर सो रहे मनीष से किस बात को लेकर बातचीत बहस में बदल गई। एसआईटी टीम ने हरवीर और प्रदीप से गोरखपुर जाने की वजह भी पूछी, मनीष गुप्ता को गोरखपुर बुलाने पर भी सवाल किया, एसआईटी टीम हरवीर प्रदीप से पूछताछ के बाद अब चंदन सैनी से दोबारा बयान दर्ज कर सकती है, जिसके बुलावे पर मनीष, हरवीर और प्रदीप गोरखपुर पहुंचे थे।

क्या है पूरा मामला
27 सितंबर की देर रात गोरखपुर के कृष्णा होटल में कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता अपने दोस्तों के साथ ठहरे हुए थे, इसी दौरान पुलिस उनके रुम में दाखिल हुई, सवाल-जवाब करने लगी, होटल में ही मनीष की बुरी तरह से पिटाई की गई, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। पुलिस पर मामले की जांच के दौरान लीपापोती करने का भी आरोप लगा, जब परिजनों ने पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का दबाव बनाया, तो पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया गया, cm yogi manish gupta case पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, फिलहाल योगी सरकार ने मामले की जांच एसआईटी को सौंपी है। इसके अलावा योगी सरकार ने सीबीआई जांच की भी सिफारिश की है, सीबीआई ने अभी तक मामले को टेकओवर नहीं किया है, क्योंकि एजेंसी को डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) से नोटिफिकेशन नहीं मिला है।