मौसम विभाग ने दे दी चेतावनी, चक्रवाती तूफान का मंडरा रहा है खतरा, किसानो के लिए हाई अलर्ट।

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भारी बारिश ,बाढ़ और तूफ़ान की वजह से कितना नुक्सान होता है ये सभी जानते है .लेकिन इन्हें कोई कैसे रोक सकता है .सालो से कितने ही चक्रवात आये और तबाही मचा कर चले गये . ऐसा ही चक्रवात फिरसे देखने को मिला है . और ऐसा अनुमान लगया जा रहा है ऐसा ही चक्रवात एक बार फिरसे हो सकता है . जिससे किसानो को भारी नुक्सान उठाना पड़ सकता है .

सितंबर के अंत में बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में साइक्लोन गुलाब का असर देखने को मिला. इन राज्यों में जमकर बारिश हुई. चक्रवात गुलाब की वजह से ही झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में अक्टूबर के शुरुआत में भारी बारिश देखने को मिली.अब उत्तरी अंडमान सागर में एक और कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है. इस कारण एक बार फिर चक्रवात की आशंका मजबूत हो गई है.

किसानों की खरीफ की फसल, खासकर धान कई इलाकों में तैयार हो चुका है और कटाई हो रही है. वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी जल्द ही कटाई की शुरुआत होगी. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में धान की फसल को पकने में थोड़ा वक्त है. अगर उत्तरी अंडमान सागर में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र चक्रवात में बदलता है तो किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा.

ओडिशा तट से टकराने वाले अधिकांश चक्रवात अक्टूबर में

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, 10 अक्टूबर के आसपास उत्तरी अंडमान सागर में एक लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है. इसके बाद अगले 4-5 दिनों में यह दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश की तरफ बढ़ेगा. अक्टूबर को ओडिशा के लिए क्रूर महीना कहा जाता है और एक बार फिर मौसमी गतिविधियां ओडिशा के लोगों के लिए अनुकूल नहीं हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक, ओडिशा तट से टकराने वाले अधिकांश बड़े चक्रवात अक्टूबर के महीने में ही आए हैं. देश में अब तक का सबसे शक्तिशाली सुपर साइक्लोन पारादीप में 29 अक्टूबर, 1999 को टकराया था. इस सुपर साइक्लोन के कारण लगभग 10,000 लोगों की मौत हो गई थी. इसके अलावा, चक्रवात फैलिन, हुदहुद और तितली भी अक्टूबर के महीने में 2013, 2014 और 2018 में आए थे.

अब तक सबसे अधिक ओडिशा में आए चक्रवात

आम तौर पर ओडिशा में चक्रवाती तूफान के लिए दो मौसम हैं. पहला मौसम मॉनसून से पूर्व (अप्रैल, मई और जून से मॉनसून की शुरुआत तक) और दूसरा मॉनसून के बाद (अक्टूबर से दिसंबर) तक है. भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वर्तमान निदेशक सरत साहू ने बताया कि मॉनसून के बाद के मौसम में ओडिशा में अधिक संख्या में चक्रवात आते हैं.

उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1891 से 2000 के बीच ओडिशा में 98 चक्रवात आए. इसके बाद आंध्र प्रदेश में 79 चक्रवात आए. पश्चिम बंगाल में 69, तमिलनाडु में 62, कर्नाटक में दो, महाराष्ट्र और गोवा में 18, गुजरात में 28 और केरल में तीन चक्रवात आए.

तेजी से वापसी कर रहा मॉनसून

वहीं एक अन्य अपडेट में IMD ने बताया कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून 08 अक्टूबर को गुजरात के कुछ और हिस्सों, राजस्थान के अधिकांश हिस्सों, पूरे पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों से वापस चला गया है.

मौसम विभाग के मुताबिक, मॉनसून की वापसी रेखा अब द्वारका, मेहसाणा, उदयपुर, कोटा, ग्वालियर, हरदोई और लाट से होकर गुजर रही है. अगले 2 दिनों के दौरान गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए स्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं.