देशभर में हो जाएगी बिजली गुल? अब ऊर्जा सचिव का बयान आया सामने, कही ऐसी बात

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आलोक कुमार ने कहा कि राजस्थान ने अपने कैप्टिव कोल माइन डेवलपर को भुगतान नहीं किया था, आपूर्ति बनाये रखने के लिये महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और यूपी को कोयला कंपनियों का बकाया चुकाना होगा।

New Delhi, Oct 11 : केन्द्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार ने कहा कि देश में बिजली आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है, उनका ये बयान ऊर्जा तथा कोयला मंत्रियों द्वारा कोयले के स्टॉक की कमी के कारण ब्लैकआउट की चिंताओं को स्वीकार करने के 1 दिन बाद आया है, उन्होने एक निजी न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा, कुछ राज्यों में कुछ इलाकों में बिजली की कमी है, लेकिन बिजली आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है, बिजली की कमी बहुत गंभीर नहीं है, उन्होने कहा कि कुछ राज्यों में कोयला कंपनियों का भारी बताया है, जबकि कुछ राज्यों में कोयले का स्टॉक कम है।

कोयला कंपनी का बकाया
आलोक कुमार ने कहा कि राजस्थान ने अपने कैप्टिव कोल माइन डेवलपर को भुगतान नहीं किया था, आपूर्ति बनाये रखने के लिये महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और यूपी को कोयला कंपनियों का बकाया चुकाना होगा, गुजरात और हरियाणा से भुगतान की कोई समस्या नहीं है, आलोक कुमार ने कहा कि कोयला सचिव ने उन्हें आश्वासन दिया था कि एनटीपीसी संयंत्रों के पास पर्याप्त कोयला है, ये सुनिश्चित करते हुए सप्लाई में तेजी लाई जाएगी।

8 अक्टूबर को बिजली की खपत 390 करोड़
सचिव ने कहा कि औसत बिजली एक्सचेंज 12-13 रुपये प्रति यूनिट के दर से भाव दे रहे हैं, अधिक बिजली सप्लाई से कीमतों में और गिरावट आने की संभावना है, कोयले का उत्पादन निश्चित रुप से बढेगा, दूसरी ओर बिजली मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक बिजली की खपत शनिवार को करीब 2 फीसदी या 7.2 करोड़ यूनिट घटकर 382.8 करोड़ यूनिट हो गई है, जो शुक्रवार को 390 करोड़ यूनिट थी, इसके चलते कोयले की कमी के बीच देश भर में बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ।

क्या है कोयले के भंडार में कमी के कारण
बिजली संयंत्रों में कोयले के भंडार में कमी होने के 4 कारण है, अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के कारण बिजली की मांग में अभूतपूर्व बढोतरी, कोयला खादानों में भारी बारिश से कोयला उत्पादन, तथा ढुलाई पर प्रतिकूल प्रभाव, आयातित कोयले की कीमतों में भारी बढोतरी, मॉनसून से पहले पर्याप्त कोयला स्टॉक नहीं करना।