जानिए किसके गम में डूबकर जगजीत सिंह ने गाया था चिठ्ठी न कोई सन्देश, ऐसी थी हालत  

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मुंबई: गजल सम्राट के नाम से फेमस जगजीत सिंह ने आज के दिन यानी 10 अक्टूबर 2011 ही दुनिया को अलविदा कहा था. जगजीत सिंह के जाने के इतने समय बाद भी उनकी आवाज और गजलों को जादू कम नहीं हुआ है. जगजीत सिंह की आवाज जितना लोग पसंद करते हैं उनके गानों में उतना दर्द भी छिपा है.

जगजीत की जिंदगी से जुड़े कई किस्से हैं. ये किस्से उनकी मोहब्बत, उनके करियर और फिल्मी सफर से जुड़े हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका बेहद पंसंदीदा गाना, चिट्ठी न कोई संदेश उन्होंने किस की याद में गाया था? नहीं तो जानिए इस गाने के पीछे की स्टोरी के बारे में. जानकारी के मुताबिक जगजीत ने अपने करियर में एक से एक हिट गीत और ग़ज़लें दी हैं. इनमें होठों से छू लो तुम, तुमको देखा तो ख्याल आया, कागज की कश्ती, कोई फरियाद जैसे एक से एक गीत शामिल हैं.

जगजीत सिंह ने कई गानों को अपनी मीठी आवाज से सजाया है, जिसमे होठों से छू लो…

वहीं अगर जगजीत और उनके परिवार की बात करें तो वह राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं. उनका जन्म श्रीगंगानगर शहर में हुआ था. जगजीत के पिता सरकारी कर्मचारी थे. घर में कई भाई बहन थे और पिता के कहने पर उनका नाम जगमोहन रखा गया. लेकिन किसे पता था ये लड़का एक दिन अपनी आवाज से दुनियाभर के दिलों पर राज करेगा.

बेटे के दूर जाने के गम में गाया ‘चिट्ठी न कोई संदेश’

बता दें गजल सम्राट जगजीत सिंह ने फिल्म दुश्मन के लिए एक फेमस गीत चिट्ठी न कोई संदेश गाया था. उनका ये गाना लोगों को खूब पसंद आया है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि जगजीत सिंह ने किसी खास के लिए इस गीत को गाया था. दरअसल जगजीत सिंह और उनकी पत्नी व सिंगर  चित्रा का एक बेटा था, जिसकी रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी. इस हादसे ने जगजीत और चित्रा को पूरी तरह से तोड़ दिया था. जिसके बाद दोनों ने संगीत की दुनिया से दूरी बना ली थी.

बेटे के जाने के गम में जगजीत सिंह ने गया था चिट्ठी न कोई सन्देश जाने कौन सा देश जहां तुम

हालांकि उन्होंने अपने गम को दूर कर उन्होंने खुद को संभाला और दोबारा वापसी की. उन्होंने इस गीत चिट्ठी ना कोई संदेश से अपना पूरा दर्द बयां किया. यह गाना उन्होंने अपने बेटे की याद में गाया था. उनका यह गाना आज भी लोगों को खूब भाता है. आज के टाइम में भी यू-ट्यूब पर करोड़ों बार सुना जा चुका है.

लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी जगजीत सिंह की आवाज

जगजीत सिंह को कई बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. साल 1998 में उन्हें साहित्य अकादमी अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है. साल 2003 में जगजीत भारत सरकार ने पद्म भूषण सम्मान से भी नवाजा था.  इतना ही नहीं 2014 में सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया. हालांकि वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेक्जिन उनकी गजलें और आवाज आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं.