सिर्फ 22 साल की उम्र में IAS बन पेश की मिसाल, पद मिलते ही ‘खनन माफिया’ पर कसी नकेल

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राजस्थान में पैदा हुईं स्वाती की पढ़ाई-लिखाई अजमेर में हुई थी.मां चाहती थीं कि बेटी डॉक्टर बने.बंसल न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में स्वाति बताती हैं कि उन्हें भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन जब वो आठवीं में थी तो उनकी माताजी की एक कजन अधिकारी बनी थीं.स्वाति के पिता से जब वो मिलने आईं तो उनके पिता काफी खुश दिखे.जिसके बाद उन्होंने अपने पापा से यूपीएससीके बारे में पूछा और अफसर बनने की ठान ली.पिता ने देखा कि स्वाति यूपीएससी की तैयारी का मन बना चुकी है तो उन्होंने भी काफी सपोर्ट किया.स्वाति के परिवार में पहले से भी कई अधिकारी थे.मां पेट्रोल पंप चलाती थीं.पिता स्वाति की लगातार तैयारी करवाते रहे.उन्होंने तैयारी के दौरान कई इंटरव्यू भी लिए.

पिता की ये मेहनत तब रंग लाई जब बेटी ने 2007 में हुए यूपीएससी एग्जाम में ऑल इंडिया 260 रैंक ले आई.उस बैच की स्वाति सबसे कम उम्र की आईएएस थीं.यूपीएससी निकालने के बाद उन्हें मध्यप्रदेश कैडर मिला.सीकर की बेटी आईएएस स्वाति मीणा नायक मध्यप्रदेश में मिसाल पेश कर रही है.स्वाति को हाल ही मध्यप्रदेश के खंडवा का जिला कलक्टर नियुक्त किया गया है.ये सीकर जिले की श्रीमाधोपुर तहसील के गांव बुरजा की ढाणी की रहने वाली हैं.

वर्ष 1984 में जन्मीं स्वाति ने साढ़े 22 साल की उम्र में वर्ष 2007 में आईएएस की परीक्षा पहले ही प्रयास 260वीं रैंक से उत्तीर्ण कर ली थी.तब ये अपने बैच में सबसे कम उम्र की थीं.जिला कलकटर के रूप में इनकी पहली पोस्टिंग मंडला में वर्ष 2012 में हुई थी.तब इनकी उम्र महज 28 साल थी.तेज़-तर्रार काम करने के तरीके और निर्भिक विचारों वाली स्वाति मीणा को ‘नो नॉनसेंस एडमिनिस्ट्रेटर’ के रूप में भी जाना जाता है. वे अपने काम के प्रति इतनी ईमानदार है कि अपने काम में किसी तरह से भी राजनेताओं का हस्तक्षेप और निकम्मे अधिकारियों को पसंद नहीं करती.

औरतलब है कि स्वाति के प्रति भी है.यहाँ तक कि दोनों को यार इसी वजह से हुआ था.श्री अग्रसर अपने काम की की सुर्खियों में रही है.तितक मध्यप्रदेश में की डीएम थी, तब उन्होंने नर्मदा के रेत और माइनिंग याओं पर प्रतिबंध लगाकर क सुखियां बटोरी थी।हैं डीएम स्वाति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी फील्ड में जाकर लोगों की समस्याओं को सुनना और उसे दूर करना पसंद करती हैं। अपने पति की ही तरह नेताओं की गैरवाजिब मांगों को उन्होंने कभी नहीं तवज्जो दी.

वे जनता से सुनकर उनकी जरूरत के काम करने को तरजीह देती हैं.काम के दौरान ही दोनों की मुलाकात हुई थी.उस समय स्वाति मध्यप्रदेश के सीधी में और आईएएस तेजस्वी कटनी में तैनात थे.धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती बढ़ती गई और दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया.25 मई 2014 को दोनों ने शादी रचा ली। तेजस्वी कर्नाटक के रहने वाले है.