ये वकील 43 वर्षों से कर रहे हैं संस्कृत में वकालत, कई बार तो जज भी हो जाते हैं कंफ्यूज

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संस्कृत को हिन्दू धर्म मे देववाणी के नाम से जाना जाता है। आज के युग में बहुत कम लोग ऐसे है जो संस्कृत पढ़ने में रुचि रखते है। आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे, जो संस्कृत (Sanskrit) भाषा मे वकालत करने वाले दुनियां के पहले वकील है।

संस्कृत में मुकदमा लड़ने वाले दुनियां के पहले वकील है

श्यामजी उपाध्याय (Shyamji Upadhyay) बनारस (Banaras) के मिर्ज़ापुर (Mirzapur) के रहने वाले हैं। श्याम जी को बचपन से ही संस्कृत (Sanskrit) भाषा में रुचि थी। वह दुनिया के पहले ऐसे वकील हैं जो संस्कृत भाषा में हर मुकदमा लड़ते हैं। यहां तक कि इनकी वकालतनामा प्रार्थना पत्र की शपथ आदि भी संस्कृत भाषा में ही जमा होती है।

देववाणी में मिली है प्रसिद्धि

श्यामजी पिछले 43 वर्षों से किसी भी मुकदमे के पहलू करने के लिए संस्कृत भाषा का ही इस्तेमाल करते हैं। श्यामजी के पिताजी स्व.संगठा प्रसाद उपाध्याय (Sangatha Prasad Upadhyay) को संस्कृत भाषा का बहुत ज्ञान था। श्यामजी को अपने पिता की तरह ही संस्कृत भाषा से बहुत लगाव रहा है। यही कारण है कि उन्हें अपनी देववाणी भाषा से प्रसिद्धि मिली है।

पिताजी जी के एक बात से बदल गयी जीवन की दिशा

श्यामजी उपाध्याय के पिता द्वारा कही गई एक बात उनके जीवन के लिए दिशा के समान था। बचपन में वह अपने पिता के साथ कहीं जा रहे थे तब उनकी उम्र महज 10 वर्ष थी और वह चौथी कक्षा के छात्र थे। रास्ते में उनके पिताजी के कुछ परिचित लोग मिल गए और उनसे भोजपुरी (Bhojpuri) भाषा में बात करने लगे। बातचीत के दौरान उनके पिताजी ने कहा कि अगर हम संस्कृत भाषा में बात करते तो कितना अच्छा होता जैसे अभी भोजपुरी भाषा में कर रहे हैं। अपने पिता द्वारा कही गई यह बात श्यामजी के मन में जच गई और तभी से संस्कृत भाषा के कायल हो गए।

गुरु की चाहत पूरा करने के लिए 1 वर्ष तक छात्रों को पढ़ाया

श्यामजी को संस्कृत भाषा से इतना प्रेम हो गया था कि वह अपने गांव से प्रारंभिक शिक्षा पूरा कर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (Sampurnanand Sanskrit University) से बौद्ध दर्शन में आचार्य किया। उनके गुरु प्रो.जग्गनाथ उपाध्याय (Professor Jaggnath Upadhyay) संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे। वह चाहते थे कि श्यामजी उपाध्याय अध्यापक बने। अपने गुरु की चाहत पूरा करने के लिए उन्होंने 1 वर्ष तक छात्रों को पढ़ाया लेकिन उनकी खुद इच्छा कुछ और थी इसीलिए उन्होंने एलएलबी (LLB) की पढ़ाई हरिश्चंद्र महाविद्यालय (Harish Chandra University) से पूरी कर कोर्ट में प्रैक्टिस करना शुरू कर दिए।

संस्कृत दिवस पर वकीलों को सम्मानित करते हैं

उन्होंने संस्कृत भाषा में अपना पहला मुकदमा 1978 में लड़ा था। उनकी संस्कृत भाषा की वकालत की शुरुआत तभी से हो गई। अपने संस्कृत भाषा को आगे बढ़ाने के लिए श्यामजी प्रत्येक वर्ष 4 सितंबर को संस्कृत दिवस (Sanskrit Day) मनाते हैं। वह संस्कृत दिवस के शुभ अवसर पर 50 से अधिक वकील को पुरस्कार से भी सम्मानित करते हैं।

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श्यामजी के संस्कृत भाषा से प्रेम की वजह से उन्हें भारत सरकार द्वारा संस्कृत मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। आज भी वह बनारस में संस्कृत भाषा के वकील के नाम से प्रसिद्ध है।