उन्होंने कहा कि इस कश्मीरी नागरिक का दर्द- वे हमारी माताओं और बहनों के साथ कड़ी मेहनत कर रहे थे और …

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कश्मीर।। यह एक ऐसी जगह है जिसे हर कोई पृथ्वी के स्वर्ग और हर किसी के मन में वहां घूमने जाने की इच्छा मानता है। लेकिन कश्मीर एक बाहरी स्वर्ग है। कश्मीर को वहां रहने वाले लोग जहांनुम की तरह ही मानते हैं। यह कट्टरपंथियों की वजह से है। इसका डर आम जनता से इतना भरा हुआ है कि वे अपना दर्द भी बयां नहीं कर पाते। लेकिन आज हम आपको कश्मीर के सोबोर में रहने वाले बिलाल की कहानी बताएंगे। वह वही है जो अपनी कहानी को दुनिया के सामने रखने का साहस रखता है। इस बारे में वह जो सुनता है वह एक आश्चर्य की बात है।

बिलाल ने उन्हें और उनके परिवार को दर्दनाक कहानियां सुनाईं और कहा कि यह अगस्त 2019 है। जब देर रात उनके घर के दरवाजे पर दस्तक हुई। दरवाजा खुलने पर कुछ लोग दौड़कर अंदर पहुंचे और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। उनके हाथों में हथियार थे। बिलाल और उसके परिवार को तब पता था कि वे आभारी थे। फिर किसी भी समय उन सभी ने सबके फोन हड़प लिए, फोन के तार काट दिए और सबको एक कमरे में कैद कर लिया। आखिर किसी ने अबू बिलाल के सिर पर हथियार रखकर कहा कि किसी को उसके आने की खबर न मिले, नहीं तो वो उसके पूरे परिवार को तबाह कर देंगे।

साथ ही घर की महिलाओं से खाना बनाने को कहा गया। देर होने पर उन्हें बार-बार धमकी दी जाती थी। खाना खाने के बाद सभी घर के अलग-अलग कमरों में सो गए। इसके बाद इन लोगों ने बिलाल के 19 साल के भाई को अपने साथ ले जाने की बात कही। यह कहते हुए बिलाल रूंधे अखबार से भाग गया कि उसका भाई किसी भी समय 12वीं का टेस्ट लिखेगा, जिसके बाद उसने डॉक्टर बनने का सपना देखा। लेकिन जब कट्टरपंथियों का कहना है कि अगर उन्हें उनके साथ नहीं भेजा गया, तो वे सभी को मार डालेंगे। उसके परिवार ने अपने भाई को आतंकवादियों के साथ भेज दिया। बिलाल का कहना है कि जब उनका भाई इन कट्टरपंथियों से लौटा तो वह पूरी तरह से बदल चुका था। जो बच्चा हमेशा मुस्कुराता रहता था, वह अब चुप है। साथ ही बाहर चिपके हुए रेंगते पोस्टर लगे थे।

फिर 11 नवंबर की रात को उसके घर पर फिर मारपीट की गई। लेकिन वे पुलिस वाले थे। जो उनके घर पर छापा मारने आए थे। उन्होंने एक-एक करके पूरे घर का सर्वे किया। इसके बाद उसने पुलिस से बिलाल के छोटे भाई के बारे में पूछा। फिर जब उन्हें पता चला तो वे उसे अपने साथ ले गए। इसके बाद उनका कहना है कि तब से ढाई साल बीत चुके हैं। लेकिन उसने अपने भाई का चेहरा नहीं देखा। यह सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम द्वारा लगाया गया था। आखिर एक तरफ उनकी मां डिप्रेशन की शिकार हो गईं। वहीं बिलाल घर पर नहीं रह सकता।

यहां तक कि उनके परिवारों ने भी उन्हें लौटने से रोक दिया। बिलाल का कहना है कि यह सिर्फ उनका घर ही नहीं, बल्कि वहां के ज्यादातर घर हैं। लड़कियां कम उम्र में ही शादी कर लेती हैं क्योंकि आतंकवादी उनकी बेटियों को उनकी बेटियों से नहीं चुराते हैं। साथ ही लड़कों को खुद से दूर रखा जाता है। ताकि बंदूकधारी उन्हें बलपूर्वक अपने साथ न ले जा सकें। बिलाल के मुंह से यह दर्द सुनते ही सबकी आंखें गीली हो जाती हैं।