अडल्ट फ़िल्म देख रहे युवक को अंधेरी गली में दिखी 13 साल की बच्ची, और फिर….

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संध्या का समय था एक युवक अपने हाथ में मोबाइल लिया हुआ था तभी उसके दोस्तों वाले व्हाट्सएप ग्रुप में एक अडल्ट फ़िल्म आई। युवक ने जैसे ही उस फिल्म के नोटिफिकेशन को देखा तो वो उसे डाउनलोड किये बिना खुद को रोक नहीं पाया। वो बेसब्री से वीडियो के डाउनलोड होने का इंतज़ार करने लगा। उस वीडियो के बारे में सोचते ही उसके पेंट के अंदर हलचल होनी शुरू हो गयी थी। हलचल हो भी क्यों ना युवक 25 साल का हो चुका था और अब तक उसकी शादी नहीं हुई थी, ना ही उसके नसीब में सुहाने अवसर लिखे हुए थे। लिहाजा हाथों से ही उसे अपने आपको सन्तुष्ट करना पड़ता था। 

यह वीडियो डाउनलोड करने की पीछे भी उसकी यही मंशा थी। बरहाल जैसे ही वीडियो डाउनलोड हुआ सुनसान अंधेरी गली में बंद दुकान की सीढ़ियों पर बैठे युवक ने अपने जेब से ईयर फोन निकाले और वीडियो देखने लगा। उसके मन में बेचैनी और उत्साह का एक अलग ही मिश्रण हिलोरे मार रहा था। यूं तो वो अपने आपको बिना कपड़े वाली लड़कियों के फोटो देख कर ही संतुष्ट कर लेता था मगर आज वो वीडियो देख कर अंदर की गर्मी को बाहर निकालने वाला था। 

हालांकि युवक आचरण में अच्छा था मगर वासना के हाथ का गुलाम था। वीडियो के शुरुआती चंद सेकंड में ही उसके पेंट के अंदर के पूर्ण तनाव को देखा जा सकता था। वीडियो में दिख रही युवती का शरीर उसकी आँखों में एक अलग चमक पैदा कर रही थी। एक हाथ में मोबाइल पकड़े युवक दूसरे हाथ से अपने तनाव को सहलाने का काम कर रहा था। तभी उसने देखा कि गली में किसी के आने की आहट हुई है। वो सकपका गाया उसका बदन पसीने से लगभग पूरा भीग चुका था। 

युवक को आश्चर्य हुआ क्योंकि सुनसान गली में इस तरह अंधेरी रात में किसी का आना विरलय ही था। उसने तपाक से दाएं और मोबाइल की लाइट घुमाई तो मोबाइल की दूधिया रोशनी में उसे एक लड़की दिखी। लड़की की उम्र होगी कुछ 13 साल, गौरा रंग तीखे नेन नक्श और छोटे से उभार भी आज युवक को बड़े लुभावने लग रहे थे। लड़की के कोमल से छोटे छोटे होंठो को देख कर युवक के होंठ सूखने और फड़ फड़ाने लगे। 

लड़की को देख युवक की आंखों में चमक आ गयी और वो धीरे धीरे उसे पाने की मंशा लिए आगे बढ़ने लगा। थोड़ी आगे जा कर एक खाली पड़े प्लाट से सटी हुई दीवार पर जा कर छिप गया। युवक उस दौरान ऐसा लग रहा था मानो एक भेड़िया अपने शिकार के आने का इंतज़ार करता है। युवक लड़की के बारे में सोच सोच कर अपने पेंट के अंदर के तनाव को और अधिक बढ़ाने का काम कर रहा था। युवक को इस वक्त वासना ने इस तरह जकड़ा हुआ था कि उसे इसके सिवा और कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था। वो अब किसी भी सूरत में इस नन्ही लड़की को पाना चाहता था और उससे अपनी प्यास बुझाना चाहता था। 

बच्ची नन्हें नन्हे कदमो से बढ़ रही थी, और जितनी युवक के पास आती जा रही थी युवक की प्यास बढ़ती जा रही थी। लड़की महज़ 2 गज की दूरी पर ही थी युवक उस पर भेड़िए की रफ्तार से जैसे ही  लपका, उसके कानो में घंटियों की आवाज तेज रफ्तार में पड़ी और साथ ही कोरस में यह शब्द

अम्बे तू है जगदंबा काली 

जय दुर्गे खप्पर वाली

 तेरे ही गुण गाये भारती 

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

युवक यह शब्द सुनकर होंश में आ चुका था। वहीं डरी हुई खड़ी छुटकी ने एकाएक कहा अरे गजोधर भैया आप। मैं तो डर ही गयी। युवक ने प्रतिउत्तर में जवाब दिया चुटकी तू अब इतने अंधेरे में घूमेंगी तो डरेगी ही। दरअसल चुटकी उसी के घर के पास रहती थी, और गजोदर को प्रत्यके राखी पर राखी बांधती थी। चुटकी ने गजोदर को कहा पापा दुकान पर गए और पर्स ले जाना भूल गए मैं उन्हें यही देने जा रही हूं।

गजोदर ने कहा चल मैं छोड़ देता हूँ आते समय मंदिर होते हुए आएंगे। चुटकी ने हाँ में सर हिला दिया और साथ चल दी। आज युवक से एक बहुत बड़ा पाप होते हुए बच गया। सचमुच पल भर की वासना उसके पूरे जीवन को बर्बाद कर देती। युवक आज मंदिर में माँ की मूर्ति से आंखे नहीं मिला पा रहा था और शायद आने वाले कुछ दिनों तक वो नहीं मिला पायेगा।