‘हिंदुओं को उनके धार्मिक स्थल खुशी-खुशी सौंप दें मुसलमान’, ज्ञानवापी मामले के बीच वायरल हुआ महात्मा गांधी का पुराना लेख

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ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद इन दिनों लगातार चर्चा में बना हुआ है। वाराणसी की एक अदालत के आदेश के बाद आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने ज्ञानवापी मस्जिद का तीन दिन का सर्वे कराया। हिंदू पक्ष का कहना है कि सर्वे के दौरान मस्जिद के अंदर शिवलिंग मिल गया है लेकिन मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज कर रहा है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में कई दावे किए गए हैं जिसमें कहा गया है कि 16वीं सदी में मुगल बादशाह औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को गिराकर ज्ञानवापी मंदिर बनवाई थी।

वहीं हाल ही में अब इस विवाद के बीच महात्मा गांधी का एक कथित लेख वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि मुसलमान खुशी खुशी धार्मिक स्थल हिंदुओं को सौंप दें। बता दें कि सर्वे के बाद भारत के वो सभी मंदिर सुर्खियों में आ गए हैं जिनके बारे में ये कहा जाता है कि मुसलमानों ने उन्हें तोड़ दिया है और उन पर अपनी मस्जिद बना ली है।

महात्मा गांधी का पुराना लेख वायरल

औरंगजेब और मुगलकाल के समय के इतिहास को याद किया जा रहा है जहां अब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का लिखा एक लेख चर्चा में आ गया है। सेवा समर्पण नाम की पत्रिका में छपे इस लेख की तस्वीर को सबसे नीचे नवजीवन के 27 जुलाई 1937 के अंक का संदर्भ दिया गया है। इसमें दावा किया जा रहा है कि महात्मा गांधी ने श्रीराम गोपाल शरद के एक पत्र के जवाब में लिखा था कि मंदिरों को तोड़कर बनाई जा रहीं मस्जिदें गुलामी का चिन्ह हैं।

इस तस्वीर में दिख रहा है कि महात्मा गांधी ने लिखा है कि किसी भी धार्मिक उपासना गृह के ऊपर बलपूर्वक अधिकार करना अपराध है। मुगलकाल में धार्मिक धर्मान्धता के कारण मुगल शासकों ने हिंदुओ के बहुत से धार्मिक स्थानों पर कब्जा कर लिया था जो हिंदुओ के पवित्र अराधना स्थल हैं। इनमें से बहुत से लूटपाट कर नष्ट कर दिए गए और बहुत को मस्जिद का रूप दे दिया गया। मंदिर मस्जिद दोनों ही भगवान की उपासना के पवित्र स्थान हैं और दोनों में कोई भेद नहीं है।

हिंदुओं के पवित्र स्थल लौटाने की कही थी बात

महात्मा गांधी ने आगे लिखा था कि एक मुसलमान ये कभी बर्दाश्त नहीं सकता कि उसकी मस्जिद में जिसमें वो बराबर इबादत करता चला आ रहा है कोई हिंदू उसमें कुछ ले जाकर धर दे। इसी तरह एक हिंदू भी कभी बर्दाश्त नहीं करेगा कि उसके मंदिर में जहां वो बराबर राधा कृष्णा, शंकर, विष्णु की उपासना करता चला आ रहा है कोई उसे तोड़कर मस्जिद बना दे। जहां ऐसे कांड हुए हैं वास्तव में ये चिन्ह गुलामी के हैं।

हिंदू मुसलमानों दोनों को चाहिए कि ऐसी जगहों पर जहां इस तरह के झगड़े हों आपस में तय कर लें। मुसलमानों के वो पूजन स्थल दो हिंदुओं के अधिकार में हैं वो उन्हें मुसलमानों को लौटा दें। इसी तरह हिंदुओ के जो धार्मिक स्थल मुसलमानों के कब्जे में हैं वो उन्हें खुशी खुशी हिंदुओं को सौंप दें। इससे भेदभाव नष्ट होगा। हिंदू-मुसलमानों में एकता बढ़ेगी।

बता दें कि 1991 में याचिकाकर्ता स्थानीय पुजारियों ने वाराणसी कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने ज्ञानवापी एरिया में पूजा करने की अनुमति मांगी थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि औरंगजेब के आदेश पर मंदिर के एक हिस्से को तोड़कर वहां मस्जिद बनाई गई थी। उनका दावा था कि मस्जिद परिसर में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। एक बार फिर इस मामले में तुल पकड़ा है। अब देखना होगा कि इसका क्या फैसला निकलकर सामने आता है।