इन राशियों के लिए है समय का सार, 3 साल तक बरबाद करेगा शनि, जानिए बचाने का उपाय!

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को एक राशि से दूसरी राशि में जाने में ढाई वर्ष का समय लगता है। शनि को सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह कहा जाता है। वहीं, पूरी राशि को पूरा करने में 30 साल का समय लगता है। इसलिए शनि की सती की तीन अवस्थाएँ होती हैं और प्रत्येक अवस्था ढाई वर्ष की होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 11 अक्टूबर 2021 को शनि सीधे मकर राशि में चला गया। और 30 साल बाद 29 अप्रैल को शनि ने अपनी ही राशि में कुंभ राशि में प्रवेश किया। अब शनि की वक्री गति 5 जून से शुरू होकर 12 जुलाई को फिर से मकर राशि में गोचर करेगी। अगले साल 17 जनवरी 2023 को मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे।

5 जून को शनि ने कुम्भ राशि में परिक्रमा की। इस बीच 3 राशियां डेढ़ के कोण में आ चुकी हैं और 2 राशियां धैर्य के कोने से बाहर आ रही हैं। 5 जून 2022 से 29 मार्च 2025 तक शनि कुंभ राशि में रहेगा। आपको बता दें कि इस बार कुंभ राशि शनि के प्रकोप से गुजर रही है।

मकर राशि

मकर इस समय शनि की साढ़ेसाती से गुजर रहा है। 29 अप्रैल से शुरू हुई साढ़े साती 11 जुलाई 2022 तक चलेगी। मकर राशि वालों के लिए यह सती की अंतिम अवस्था है।

कुंभ राशि

शनि के गोचर का सबसे अधिक प्रभाव कुंभ राशि पर पड़ता है। ऐसे में इन लोगों को थोड़ा सावधान रहना चाहिए। कुंभ राशि वालों के लिए करियर और वित्त के मामले में यह कठिन समय हो सकता है। इस दौरान हमें आलस्य छोड़ना होगा और मेहनत पर ध्यान देना होगा। साथ ही अपने खर्च पर नियंत्रण रखें।

मीन राशि

ज्योतिष के अनुसार मीन राशि के जातकों के लिए 12 जुलाई तक शनि प्रथम चरण में रहेगा। ऐसे में मीन राशि के लोगों को कोई भी फैसला संयम और सोच-समझकर ही लेना चाहिए। नहीं तो आपको किसी भी तरह का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

शनि से जूझ रहे हैं ये लोग

इस बार वृश्चिक और कर्क राशि के लोग शनि से जूझ रहे हैं। और अगले दो-ढाई साल तक यह उन्हीं के ऊपर रहने वाला है। इससे इन लोगों को शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

मकर राशि

हर शनिवार और हो सके तो नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करें। पिंपल के पेड़ के पास शनि स्रोत का पाठ करें। पिंपल के पेड़ पर कच्ची लस्सी में काले तिल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।

कुंभ राशि

शनि के मध्य में मंत्रों का जाप करना लाभकारी होता है।

मीन राशि

शुभ अवसरों पर काले घोड़े के जूते और मध्यमा अंगुली पर कीलों से बनी अंगूठी रखें।

तुला

काले कुत्ते को हर शनिवार को भोजन कराएं।

वृश्चिक

शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।

मिथुन राशि

अमावस्या को शाम को सूर्यास्त के बाद शनि की पूजा करनी चाहिए। शनि मंत्र का जाप करें।