महिला ने सड़क किनारे दिया बच्चे को जन्म, फिर उसी को उठाकर धूप में 150 किलोमीटर चली

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इन दिनों में आम लोगो की हालत इतनी खस्ता हो चली है जिसकी कोई हद नही है. कही न कही लोग जो दुसरे राज्यों में या शहरो में फंस गये है या फिर जिनके पास में अपना आशियाना नही है उनका तो लॉकडाउन में मानो कोई अपना ही नही है. ऐसा ही एक नजारा सड़क किनारे हाल ही में दिखा. लॉकडाउन के बीच में मजदूरों का आना जाना जारी है और सब के सब बिचारे पैदल आ जा रहे है.

ऐसे वक्त में एक 9 महीने की प्रेग्नेंट महिला भी नासिक से सतना के लिए मजदूरों के साथ ही निकल गयी. अब वो काफी चली ही थी कि उसे लेबर पेन होने लगा और वो सड़क किनारे बैठ गयी जहाँ पर महिला ने अपने बच्चे को जन्म दिया. बच्चे को जन्म देने पर आस पास मौजूद जो भी लोग थे उन्होंने थोड़ी बहुत सहायता दी और ढाढस बंधाया.

ये सब कुछ होने के बाद में महिला एक घंटे तक वही पर ही बैठी रही और कुछ देर के बाद में वो खुद ही खड़ी हुई और चल पड़ी. इसके बाद वो लगभग 150 किलोमीटर तक अपने नवजात शिशु को लेकर के पैदल चली और बिजवासन बॉर्डर तक पहुची तब जाकर के कुछ सहायता हो सकी.

ये अपने आप में लचर सिस्टम को दर्शाता है जहाँ एक अमीर को घर से ही एम्बुलेंस पिक कर लेती है और सब सुविधा मिलती है जबकि एक गरीब औरत को सड़क किनारे में बच्चे को जन्म देना पड़ता है कही न कही ये चीज दुःख भी देती है और तकलीफ भी लेकिन ऐसे वक्त में दोष भी किसे दिया जाए? महामारी के आगे सरकार प्रशासन और व्यवस्था सब के सब बेबस होकर के बैठ गये है और किसी के भी बस में मानो कुछ रहा ही नही है जो दर्शाता है कि हम अभी भी कमजोर है.